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IPO Terminology : आईपीओ में करते हैं निवेश, लेकिन नहीं जानते इससे जुड़े भारी-भरकम शब्दों के मायने? यहां समझिए

IPO Terminology : कई निवेशक ऐसे हैं जो आईपीओ में निवेश तो करते हैं लेकिन उन्हें इसमें इस्तेमाल होने वाले कई भारी-भरकम शब्दों का मतलब नहीं पता होता है। आज हम यहां आईपीओ से जुड़े ऐसे ही 5 टर्मिनोलॉजी के बारे में बताने जा रहे हैं

Edited By: Shubham Singh Thakurअपडेटेड Jul 20, 2023 पर 9:04 PM
IPO Terminology : आईपीओ में करते हैं निवेश, लेकिन नहीं जानते इससे जुड़े भारी-भरकम शब्दों के मायने? यहां समझिए
IPO Terminology : शेयर बाजार में तेजी के बीच पिछले कुछ समय में लगातार कई कंपनियों ने अपना आईपीओ लॉन्च किया है।

IPO Terminology : शेयर बाजार में तेजी के बीच पिछले कुछ समय में लगातार कई कंपनियों ने अपना आईपीओ लॉन्च किया है। जुलाई में अब तक कम से कम 15 कंपनियों (एक्सचेंज के एसएमई प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंपनियों सहित) की लिस्टिंग हो चुकी है। सेबी के पास दाखिल ड्राफ्ट ऑफर दस्तावेजों के अनुसार आने वाले समय में और कई आईपीओ आने वाले हैं। कई निवेशक ऐसे हैं जो आईपीओ में निवेश तो करते हैं लेकिन उन्हें इसमें इस्तेमाल होने वाले कई भारी-भरकम शब्दों का मतलब नहीं पता होता है। आज हम यहां आईपीओ से जुड़े ऐसे ही 5 टर्मिनोलॉजी के बारे में बताने जा रहे हैं

फिक्स्ड प्राइस VS बुक-बिल्ट इश्यू

एक फिक्स्ड प्राइस वाले इश्यू में कंपनी पहले ही तय कर लेती है कि आईपीओ में निवेशकों को किस कीमत पर शेयर जारी किए जाएंगे। उदाहरण के लिए टेक कंपनी AccelerateBS India हाल ही में BSE SME एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। कंपनी ने 90 रुपये प्रति शेयर के फिक्स्ड इश्यू प्राइस की घोषणा की थी।

लेकिन BSE या NSE मेनबोर्ड पर लिस्ट अधिकांश (गैर-SME) कंपनियां इन दिनों बुक-बिल्ट इश्यू का विकल्प चुनती हैं। इसके तहत आईपीओ लाने वाली कंपनी तय कीमत के बजाय प्राइस बैंड की घोषणा करती है। इसके बाद इस सीमा के भीतर कीमतों पर इन शेयरों के लिए बोली के आधार पर इश्यू प्राइस तय किया जाता है।

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