Moneyview IPO: एस्सेल (Accel), रिबिट कैपिटल (Ribbit Capital), टाइगर ग्लोबल ग्रुप (Tiger Global Group) और एपिस पार्टनर्स (Apis Partners) के निवेश वाली मनीव्यू के आईपीओ का साइज कम हो गया है। डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म मनीव्यू ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) से मंजूरी के बाद यह फैसला किया है और इसके लिए कंपनी को दोबारा आईपीओ का ड्राफ्ट भी नहीं करना पड़ा। 14 सितंबर को निवेशकों को भेजे गए नोटिस के मुताबिक मनीव्यू के आईपीओ के तहत अब ₹1500 करोड़ की बजाय ₹750 करोड़ के ही नए शेयर जारी होंगे तो ऑफर फॉर सेल के तहत अब 13.6 करोड़ की बजाय 10.04 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी।
Moneyview IPO: दोबारा क्यों नहीं फाइल करना पड़ा ड्राफ्ट
मनीव्यू ने मार्च 2026 में आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल किया था। इस पर सेबी ने जुलाई 2026 में ही झंडी दिखाई थी। अब कंपनी ने बिना नया ड्राफ्ट फाइल किए आईपीओ का साइज घटा दिया और यह सेबी के नए नियम के चलते हुआ है। अप्रैल 2026 में सेबी ने एक नियम पेश किया था, जिसके तहत कंपनियों को आईपीओ का ड्राफ्ट दोबारा फाइल किए बिना फ्रेश इश्यू का साइज 50% तक घटाने की मंजूरी मिल गई। इस नियम के तहत मनीव्यू ने बिना दोबारा आईपीओ ड्राफ्ट फाइल किए 3 सितंबर को सेबी के पास आईपीओ का साइज घटाने की मंजूरी मांगी और सेबी ने 10 सितंबर को ग्रीन सिग्नल दे दिया। इससे पहले हीरो मोटर्स, जुनिपर ग्रीन एनर्जी, इंडो-एमआईएम, रुनवाल एंटरप्राइजेज, और रेजन सोलर भी सेबी के नए नियम के तहत अपने आईपीओ का साइज हल्का कर चुके हैं।
Offer for Sale में कौन बेच रहा कितने शेयर
फ्रेश इश्यू साइज में कटौती के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत मनीव्यू के कितने शेयर बिकेंगे, इसकी भी संख्या कम हुई है क्योंकि शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स अब कम शेयर बेचेंगे। प्रमोटर्स- पुनीत अग्रवाल और संजय अग्रवाल ने कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन क्रिमसन विंटर, इंटरनेट फंड 3, एस्सेल, एनएलआई स्ट्रैटेजिक वेंचर इंवेस्टमेंट, टीआई जेपीएनआईएन इंडिया होल्डको और रिबिट कैपिटल अब ड्राफ्ट की तुलना में कम शेयर बेचेंगे तो पुनीत अग्रवाल की पत्नी चित्रा अग्रवाल ने ऑफर फॉर सेल के जरिए 19.35 लाख शेयर बेचने का फैसला किया है, जबकि एपिस पार्टनर्स अब शेयर नहीं बेचेगी। मनीव्यू में सबसे अधिक हिस्सेदारी एस्सेल की है, जिसके पास 21.89% होल्डिंग है तो इसके बाद टाइगर ग्लोबल ग्रुप की 13.79%, प्रमोटर संजय अग्रवाल की 10.33% और रिबिट कैपिटल की 10.2% हिस्सेदारी है।
कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल
ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत जुटाए गए पैसे तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल की योजना में भी कंपनी ने बदलाव किया है और अब इसके ₹325 करोड़ का इस्तेमाल DLG (डिफॉल्ट लॉस गारंटी) प्रोग्राम के तहत लोन बांटने और ग्रोथ की स्पीड बढ़ाने में होगा तो ₹250 करोड़ सब्सिडरी व्हिजडम फाइनेंस (Whizdm Finance) की कैपिटल मजबूत करने के लिए उसमें निवेश और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।