एनएसई के आईपीओ के खुलने से पहले एक्सचेंज के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने 11 सितंबर को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एनएसई ने खुद के प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर की ट्रेडिंग की इजाजत मांगने के लिए सेबी के पास अप्लाई नहीं किया है। एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक निवेश किया जा सकता है।
1700-1785 रुपये का प्राइस बैंड
ब्लूमबर्ग ने पिछले महीने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि एनएसई के शेयर औपचारिक रूप से बीएसई पर लिस्ट होंगे, लेकिन 'परमिटेड टू ट्रेड' कैटेगरी में शेयर की ट्रेडिंग एनएसई के अपने प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। एनएसई ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है।
24 सितंबर को लिस्ट होंगे शेयर
एंकर इनवेस्टर्स के लिए यह आईपीओ 16 सितंबर को खुल जाएगा। शेयर 24 सितंबर को बीएसई पर लिस्ट होने की संभावना है। चौहान ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "एनएसई भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज है। यह दुनिया के सबसे एक्सचेंजों में से एक है। एनएसई का मकसद सेविंग्स कैपिटल में चैनलाइज करना है।" उन्होंने कहा कि एनएसई ने उस मकसद को पूरा किया है, जिसके लिए फाउंडर्स ने इसे शुरू किया था।
सबसे बड़े एक्सचेंजों में शामिल
उन्होंने कहा, "एनएसई सबसे बड़े वर्टिकली इंटिग्रेटेड एक्सचेंजों में से एक है, क्योंकि हमारी खुद की टेक्नोलॉजी है। कुछ एक्सचेंज कमोडिटीज या इक्विटीज पर फोकस करते हैं। हम कई एसेट क्लास कवर करते हैं, जिनमें कमोडिटीज, करेंसीज, इलेक्ट्रिसिटी और यहां तक कि चैरिटी भी शामिल है।"
कैश मार्केट में 95% हिस्सेदारी
एनएसई का प्रॉफिट FY26 में 10,300 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुकाबले 15 फीसदी कम है। एक्सचेंज का रेवेन्यू अप्रैल 2019 से अप्रैल 2026 के बीच दोगुना हो गया। इसमें इंडिया ऑप्शंस ट्रेडिंग में बढ़ती दिलचस्पी का हाथ है। कैश मार्केट में एनएसई की हिस्सेदारी करीब 95 फीसदी है, जबकि इक्विटी डेरिवेटिव्स में इसकी हिस्सेदारी 75 फीसदी है। एनएसई ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट्स के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है।
इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल
एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एक्सेंज इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। एक्सचेंज के कुछ पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचेंगे। इसलिए आईपीओ से कोई पैसा एनएसई को नहीं मिलेगा। पहले इस आईपीओ का आकार 30,000 करोड़ रहने होने का अनुमान था। लेकिन, अब एनएसई ने इसका साइज घटा दिया है।