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NSE IPO का रास्ता साफ! SEBI की कमेटी ने ₹1800 करोड़ में सेटलमेंट का रखा प्रस्ताव

NSE IPO: लंबे समय से एनएसई के आईपीओ का निवेशक इंतजार कर रहे हैं। हालांकि को-लोकेशन मामले ने इसका रास्ता ब्लॉक किया हुआ था जो अब साफ होता दिख रहा है। सेबी की एक कमेटी ने ₹1800 करोड़ के सेटलमेंट की सिफारिश की है। हालांकि यह एनएसई की पेशकश से अधिक है। जानिए यह पूरा मामला क्या है, दोनों पक्षों के सेटलमेंट प्रस्ताव में कितना फर्क है और आईपीओ पर काम कहां तक पहुंचा है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Apr 22, 2026 पर 9:18 AM
NSE IPO का रास्ता साफ! SEBI की कमेटी ने ₹1800 करोड़ में सेटलमेंट का रखा प्रस्ताव
NSE ने पिछले महीने अपने आईपीओ को मैनेज करने के लिए 20 बैंकों को नियुक्त किया था जोकि भारत में किसी भी आईपीओ के लिए अब तक सबसे अधिक है।

NSE Co-Location Case: सेबी की एक एक्सटर्नल कमेटी ने सिफारिश की है कि अटके कानूनी विवादों के निपटारे के लिए ₹1800 करोड़ ($19.25 करोड़) का पेमेंट करे। यह सिफारिश दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव्स एक्सचेंज को बाजार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के साथ लंबे समय चल रहे विवाद के समाधान के करीब ले आती है। बता दें कि गवर्नेंस में खामियों और सभी ट्रेडिंग मेंबर्स को एक जैसा एक्सेस नहीं देने के आरोपों के चलचे एनएसई का आईपीओ भी लगभग 10 वर्षों से टलता आ रहा है।

SEBI की कमेटी ने क्या की है सिफारिश?

सेबी की HPAC (हाई-पावर्ड एडवायजरी कमेटी) ने एनएसई के को-लोकेशन मामले में ₹1,800 करोड़ से अधिक के सेटलमेंट की सलाह दी है। सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है। जानकारी के मुताबिक कमेटी की इस सिफारिश पर अब सेबी के दो पूर्णकालिक सदस्यों की मंजूरी लेनी होगी। इन ₹1,800 करोड़ में से ₹1,200 करोड़ डिस्गॉर्जमेंट राशि हो सकती है, ₹400 करोड़ ब्याज के रूप में होंगे, जबकि शेष राशि समझौते की शर्तों के तहत तय की जाएगी। बता दें कि एनएसई ने पिछले साल 20 जून को सेबी के पास एक सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल किया था जिसमें उसने मामले को समाप्त करने के लिए ₹1,387.39 करोड़ की पेशकश की थी ताकि लंबे समय से अटकी लिस्टिंग का रास्ता साफ हो सके। इसमें से लगभग ₹600 करोड़ पहले ही एस्क्रो खाते में जमा किए जा चुके हैं। सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों ने बताया कि बाकी पैसे पेमेंट का फाइनल नोटिस आने पर जमा किया जाएगा।

क्या है NSE Co-Lacation Case?

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