NSE IPO आज, 17 सितंबर से ओपन; साइज, प्राइस बैंड, GMP समेत 10 पॉइंट में पूरी डिटेल; क्या लगाने चाहिए पैसे?
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। IPO की ओपनिंग से पहले NSE ने कई बड़े घरेलू और वैश्विक एंकर निवेशकों से 6,746.18 करोड़ रुपये जुटाए
NSE का इरादा IPO से 22561.5 करोड़ रुपये जुटाने का है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO के लिए इंतजार खत्म हुआ। यह आज, 17 सितंबर को खुलने जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का नया ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था और सितंबर में SEBI की मंजूरी मिल गई। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से आने की बाट जोह रहा था।
NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। आइए जानते हैं NSE IPO से जुड़ी खास बातें...
साइज
NSE का इरादा 22561.5 करोड़ रुपये जुटाने का है। प्राइस बैंड के अपर एंड पर वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठती है।
प्राइस बैंड और लॉट साइज
प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 8 इक्विटी शेयरों का है।
अहम तारीखें
यह पब्लिक इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होगा। उसके बाद शेयरों की लिस्टिंग BSE पर 24 सितंबर को होगी।
IPO की ओपनिंग से पहले NSE ने कई बड़े घरेलू और वैश्विक एंकर निवेशकों से 6,746.18 करोड़ रुपये जुटाए। एक्सचेंज ने 1,785 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 3,77,93,739 इक्विटी शेयर अलॉट किए। एंकर बुक में सबसे बड़ी निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) रही।
IPO पूरी तरह से OFS
NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS होने के चलते शेयर बिक्री से मिला पैसा, ऑफर से जुड़े खर्चों को घटाने के बाद OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा। OFS में मौजूदा शेयरहोल्डर 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखने वाले हैं। शेयर बिक्री करने वालों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, SBI कैपिटल मार्केट्स, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, क्राउन कैपिटल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, इंडियन बैंक, ICICI लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी आदि शामिल हैं।
IPO में कितना हिस्सा रिजर्व
NSE ने IPO में अपने कर्मचारियों के लिए 70 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व किए हैं। ये उन्हें फाइनल इश्यू प्राइस पर 170 रुपये प्रति शेयर की छूट के साथ ऑफर किए जाएंगे। बाकी बचे नेट इश्यू में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।
NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर
NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।
NSE IPO के लिए 19 बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, एवेंडस कैपिटल, Dam कैपिटल एडवाइजर्स, HDFC Bank, IDBI Capital Markets, ICICI Securities, मॉर्गन स्टेनली इंडिया भी शामिल हैं। इश्यू के लिए रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।
NSE की वित्तीय सेहत
NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।
GMP
ग्रे मार्केट में NSE का शेयर 7 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।
क्या लगाने चाहिए पैसे
एंजल वन: सब्सक्राइब
एंजल वन ने इस इश्यू को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने इसके पीछे NSE की मजबूत मार्केट पोजिशन, ज्यादा रेवेन्यू और मुनाफे, इक्विटी डेरिवेटिव्स में अच्छे मार्केट शेयर और भारत के कैपिटल मार्केट में लंबे समय की ग्रोथ की संभावनाओं का हवाला दिया। लेकिन साथ ही डेरिवेटिव्स वॉल्यूम के लिए निकट भविष्य में रेगुलेटरी चुनौतियों की ओर भी इशारा किया।
स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट: सब्सक्राइब
स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट ने लंबी अवधि के निवेश और संभावित लिस्टिंग गेन्स, दोनों के लिए IPO को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने भारतीय कैपिटल मार्केट में NSE की लीडरशिप पर जोर दिया। कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी लगभग 93% और इक्विटी फ्यूचर्स मार्केट में लगभग 99.8% है। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि NSE का लगभग 79% रेवेन्यू ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ा है, जिससे इसकी कमाई मार्केट की गतिविधियों और रेगुलेटरी बदलावों के प्रति संवेदनशील हो जाती है।
जियोजित: सब्सक्राइब
जियोजित ने भी मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए "सब्सक्राइब" रेटिंग दी है। ब्रोकरेज के अनुसार, ₹1,785 की कीमत पर, पोस्ट-इश्यू बेसिस पर NSE की वैल्यूएशन FY26 की एडजस्टेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) का लगभग 42 गुना है। जियोजित ने भारत के इक्विटी और डेरिवेटिव्स मार्केट में NSE की मजबूत स्थिति, इसके इनवेस्टर इकोसिस्टम, नेटवर्क इफेक्ट और स्केलेबल टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया। इसने एक्सचेंज के एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल, ज्यादा मार्जिन और कैश जेनरेशन की ओर भी इशारा किया। ब्रोकरेज को इसमें लंबी अवधि की ग्रोथ का मौका दिख रहा है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग: न्यूट्रल
रेलिगेयर ब्रोकिंग ने IPO पर न्यूट्रल नजरिया अपनाया है। उसने NSE की स्ट्रक्चरल ग्रोथ की संभावनाओं और रेगुलेशन, ट्रेडिंग एक्टिविटी और वैल्यूएशन से जुड़े जोखिमों के बीच संतुलन का हवाला दिया। ब्रोकरेज ने कहा कि FY26 की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस रेगुलेटरी बदलावों और ट्रेडिंग एक्टिविटी में कमी से प्रभावित हुई, हालांकि ऑपरेशनल मेट्रिक्स मजबूत बने रहे। 42.9x के P/E पर, रेलिगेयर ने कहा कि वैल्यूएशन NSE की स्थापित मार्केट स्थिति और भविष्य की ग्रोथ की संभावनाओं को दिखाती है, लेकिन साथ ही कमाई में निराशा की कम ही सही पर गुंजाइश है। ब्रोकरेज के मुताबिक, ऑप्शंस ट्रेडिंग से जुड़े SEBI के उपाय समेत रेगुलेटरी डेवलपमेंट्स वे फैक्टर हैं जो NSE की ट्रेडिंग वॉल्यूम और ट्रांजेक्शन-बेस्ड आय को प्रभावित कर सकते हैं।
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