NSE IPO: इंतजार खत्म, प्राइस बैंड ₹1700-₹1785 प्रति शेयर हुआ तय; इश्यू का साइज घटकर ₹22562 करोड़
NSE IPO: इरादा 22561.5 करोड़ रुपये जुटाने का है। प्राइस बैंड के अपर एंड पर वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठती है। IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। 10 मौजूदा शेयरहोल्डर 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखने वाले हैं
NSE के शेयरों की लिस्टिंग BSE पर 24 सितंबर को होगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO के प्राइस बैंड के लिए इंतजार की घड़ियां आखिरकार खत्म हुईं। यह 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 8 इक्विटी शेयरों का है। यह पब्लिक इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एंकर निवेशक 16 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। IPO बंद होने के बाद अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होगा। उसके बाद शेयरों की लिस्टिंग BSE पर 24 सितंबर को होगी।
NSE का इरादा 22561.5 करोड़ रुपये जुटाने का है। प्राइस बैंड के अपर एंड पर वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठती है। NSE IPO का लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था और सितंबर में SEBI की मंजूरी मिल गई। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।
NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी।
OFS का साइज
NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में 10 मौजूदा शेयरहोल्डर 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखने वाले हैं। इन शेयरहोल्डर्स में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड और अरांडा इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) भी शामिल हैं।
OFS होने के चलते शेयर बिक्री से मिला पैसा, ऑफर से जुड़े खर्चों को घटाने के बाद OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा। इश्यू का साइज 15 प्रतिशत कम कर दिया गया है। जून 2026 में फाइल किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार OFS में 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने की योजना थी।
OFS में कौन बेच रहा है शेयर
NSE IPO के तहत OFS में सबसे ज्यादा शेयर SBI बेचने वाला है। यह 1.59 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखेगा। इसके अलावा कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़ शेयर, अरांडा इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) 1.12 करोड़ शेयर, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) 1.1 करोड़ शेयर और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी 1.05 करोड़ शेयर बेचेंगे। SBI कैपिटल मार्केट्स 87.8 लाख शेयर बेचेगी।
SBI, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या कम कर दी है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी अब OFS के जरिए शेयर नहीं बेच रही है। NSE ने IPO में अपने कर्मचारियों के लिए 70 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व किए हैं। ये उन्हें फाइनल इश्यू प्राइस पर 170 रुपये प्रति शेयर की छूट के साथ ऑफर किए जाएंगे।
NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।
IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट
NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।
NSE की वित्तीय सेहत
NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।