Waaree Energies IPO: 8 महीने पहले दाखिल किए गए थे आईपीओ कागजात, अब तक नहीं मिली मंजूरी, जानिए वजह

Waaree Energies IPO: मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कंपनी एक्ट का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी चिंताओं के कारण इस आईपीओ में देरी हो रही है। यह एक्ट अनलिस्टेड कंपनियों को बिना पब्लिक ऑफर के 200 से अधिक लोगों को शेयर बेचने से रोकता है

अपडेटेड Aug 27, 2024 पर 8:47 PM
भारत की सोलर पैनल बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी वारी एनर्जीज ने 8 महीने पहले आईपीओ लाने के लिए आवेदन किया था।

Waaree Energies IPO: भारत की सोलर पैनल बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी वारी एनर्जीज ने 8 महीने पहले आईपीओ लाने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, कंपनी को अब भी मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी का इंतजार है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कंपनी एक्ट का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी चिंताओं के कारण इस आईपीओ में देरी हो रही है। यह एक्ट अनलिस्टेड कंपनियों को बिना पब्लिक ऑफर के 200 से अधिक लोगों को शेयर बेचने से रोकता है। कंपनी ने 29 दिसंबर 2023 को आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किया था।

क्यों हो रही है Waaree Energies के IPO में देरी

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 42 (2) के अनुसार कोई भी अनलिस्टेड कंपनी पब्लिक ऑफर किए बिना एक वित्तीय वर्ष में 200 से अधिक लोगों को शेयर नहीं बेच सकती है। अगर ऐसी कोई शेयर बिक्री हुई है, तो इसे रेगुलेशन के तहत डीम्ड पब्लिक इश्यू (DPI) माना जाता है और इसके चलते जुर्माना लगाया जा सकता है।


सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वारी एनर्जीज ने प्री-आईपीओ राउंड में फंड जुटाया, जिसके बाद निवेशकों ने कंपनी के शेयर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) और फैमिली ऑफिस जैसे अन्य लोगों को बेच दिए, जिससे 200-निवेशक की लिमिट का उल्लंघन हुआ है।

कंपनी ने अगस्त 2023 में इनवेस्टमेंट फर्म ValueQuest के नेतृत्व में फंडिंग राउंड में 1000 करोड़ रुपये जुटाए और पिछले राउंड में फैमिली ऑफिस और HNI सहित कई निवेशकों से 1040 करोड़ रुपये जुटाए थे।

इसके पहले मनीकंट्रोल ने 14 मई को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि मोबिक्विक समेत कई कंपनियों को डीम्ड पब्लिक ऑफर नियमों के उल्लंघन के कारण अपने आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी हासिल करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में DPI से नॉन-कंप्लायंस कंपनी द्वारा सीधे निवेशकों को अपने शेयर बेचने के कारण नहीं है, बल्कि इन कंपनियों के मौजूदा निवेशकों/शेयरधारकों द्वारा अपने शेयर बेचने के कारण है।

सूत्रों ने कहा कि इन कंपनियों की कोई गलती नहीं है क्योंकि उन्होंने खुद 200 से ज्यादा लोगों को शेयर नहीं दिए थे और वे यह भी कंट्रोल नहीं कर सकते कि उनके शेयरधारक शेयरों के साथ क्या करेंगे।

वारी एनर्जीज के ड्राफ्ट शेयर सेल डॉक्यूमेंट के अनुसार, कंपनी में 2673 इंजिविजुअल पब्लिक शेयरहोल्डर थे, जिनके पास 27.68 फीसदी हिस्सेदारी थी। सेबी की वेबसाइट पर लेटेस्ट आईपीओ प्रोसेसिंग स्टेटस अपडेट से पता चलता है कि रेगुलेटर ने 21 मई को कंपनी के बैंकरों से कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे और सेबी अभी भी कंपनी और उसके बैंकरों से जवाब का इंतजार कर रहा है।

एक सूत्र ने कहा, "चूंकि यह कंपनी एक्ट का नॉन-कंप्लायंस है, इसलिए वारी को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज एंड मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) के साथ इस मामले को सुलझाना होगा। नॉन-कंप्लायंस के लिए उन्हें जुर्माना देना पड़ सकता है। लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा क्योंकि इसके लिए MCA से मंजूरी की जरूरत होगी। इस तरह, आईपीओ में लंबी देरी हो रही है।" मनीकंट्रोल को वारी एनर्जीज को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब स्टोरी पब्लिश किए जाने तक नहीं मिला।

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