पहले कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और अब पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम। इसने कोरोना काल में MSME सेक्टर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शहरों में डीजल 100 रुपये के पार चला गया है। यानी पिछले 6 महीने में प्रति लीटर 15 रुपये के करीब बढ़ोतरी। इसने इंडस्ट्री की फ्रेट इनपुट कॉस्ट में 30 परसेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है। मौजूदा हालात में डिमांड की कमी से जूझ रही इंडस्ट्री ने सरकार से तुरंत राहत की मांग की है।
पेट्रोल के बाद डीजल भी सौ के आंकड़े को पार कर गया है। तेल की बढ़ती कीमतों से आम कंज्युमर के साथ साथ अब इंडस्ट्री भी त्राहिमाम कर रही है। खासकर छोटे और मझोले कारोबारी लगातार बढ़ते इनपुट कॉस्ट से मुश्किलों में घिर गए हैं।
इंडस्ट्री की मानें तो पिछले 4 महीने में कई कैटेगरी के कच्चे माल के दाम दोगुने तक बढ़ गए हैं। स्टील, कॉपर, एल्यूमिनियम के दाम 40 परसेंट से ज्यादा बढ़े हैं। वहीं पीवीसी पाइप जैसे उत्पाद 50 परसेंट से ज्यादा महंगे हुए हैं। इतना ही नहीं कपड़ों से जुड़े कच्चे माल मसलन यार्न और कॉटन फैबरिक की कीमतें तो 60 परसेंट तक बढ़ी हैं। ऊपर से अब लगातार महंगे होते डीजल ने इनपुट कॉस्ट में अच्छी-खासी बढ़ोतरी कर दी है।
Kor Energy के MD सुशील सरावगी का कहना है कि डोमेस्टिक डिमांड हो या एक्सपोर्ट तेल की बढ़ती कीमतों का असर सभी जगह दिख रहा है,नपुट कॉस्ट लगातार बढ रहा है, छोटे कारोबारी ज्यादा परेशान हैं क्योंकि डिमांड नहीं होने की वजह से वो इसे पासऑन नहीं कर पा रहे हैं। सरकार तुरंत राहत देने के अलावा पेट्रोल डीजल को जीएसटी में शामिल करे।
साल 2021 में अब तक डीजल प्रति लीटर 15 रूपये से ज्यादा महंगा हो गया है। देश के 8 शहरों में ये 100 के पार जबकि लगभग सभी शहरों में 90 के पार पहुंच गया है। ऐसे में कच्चे माल की महंगाई से जूझ रही इंडस्ट्री की फ्रेट इनपुट कॉस्ट तो 30 पर्सेंट तक बढ़ी है पर डिमांड कम होने से वो इसे कंज्युमर को पास ऑन नही कर पा रहे हैं।
इंडस्ट्री कह रही है कि सरकार कॉमर्शियल ट्रांसपोर्ट के लिए डीजल को कुछ समय के लिए सब्सिडाइज्ड कर दे। साथ ही उन एमएसएमई को भी इमरजेंसी क्रेडिट फैसेलिटी का फायदा मिले जिन्हें अभी तक कही से क्रेडिट नही मिला है जिनकी संख्या 60 पर्सेंट के करीब है।मुश्किलों में घिरी इस इंडस्ट्री को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है क्योंकि सबसे ज्यादा नौकरियां यही से पैदा होती हैं।