अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने मार्च 2022 के बाद से नीतियों में लगातार सख्ती बरतने का संकेत दिया है। इसके चलते गुरुवार को ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट आई। जहां अमेरिकी फेड की नीति और पूर्वी यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ग्लोबल मार्केट में उठापटक जारी है। वहीं एनालिस्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की तरफ से भारी बिकवाली के चलते भारतीय बाजार भी उसी दबाव का सामना कर रहे हैं।
हालांकि कुछ एनालिस्ट्स का मानना है बजट के बाद यह ट्रेंड बदल सकता है और 1 फरवरी के बाद बाजार तेजी देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि पिछले तीन साल से बजट के बाद बाजार में तेजी आने का ट्रेंड रहा है और इस साल भी यह ट्रेंड बरकरार रह सकता है।
ट्रेडिंगो के फाउंडर पार्थ न्याती ने कहा, "अगर हम भारतीय बाजार को देखें तो ऐसे बहुत सारे सकारात्मक ट्रिगर हैं जो हमारे बाजार को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए ग्लोबल बाजारों में कुछ शांति की जरूरत है। बाजार में बजट के पास आकर उत्साह खत्म होता दिख रहा है। ऐसे में इस बात की अच्छी संभावना है कि बजट के बाद बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। खासतौर से अगर हम पिछले तीन सालों के ट्रेंड को देखें, तो इसकी संभावना और बढ़ जाती है। पिछले तीन बजट के दौरान बाजार में हमेशा बजट के पहले गिरावट आई गाई है और उसके बाद इसमें अच्छी रैली देखी जाती है।"
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 581.21 अंक यानी 1 फीसदी की गिरावट के साथ 57,276.94 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का इंडेक्स निफ्टी 67.80 अंक यानी 0.97 फीसदी टूटकर 17,110.15 के स्तर पर बंद हुआ। इस हफ्ते शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है और दोनों बेंचमार्क इंडेक्स ने इस साल की सारी बढ़त को खो दिया है।