Sensex 1,200 अंकों तक टूटा, क्या म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को करनी चाहिए फेड की चिंता?

mutual fund investors : यदि आप अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर अच्छी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश कर रहे हैं तो अपना निवेश जारी रखिए

अपडेटेड Jan 27, 2022 पर 3:55 PM
स्टॉक मार्केट में गिरावट कै साथ अप म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स की चिंता भी बढ़ गई है

mutual fund investors : यूएस फेड (US Fed) के कल मार्च से ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के बयान के बाद भारतीय स्टॉक मार्केट में घबराहट का माहौल है। अमेरिका का सेंट्रल बैंक महंगाई को लेकर ज्यादा चिंतित है और ऐसा लगता है कि मजबूत ग्रोथ और इम्प्लॉयमेंट डाटा से उन्हें ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलेगी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या भारतीय म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स (mutual fund investors) को फेड के कदम को लेकर चिंतित होना चाहिए?

कंपनियों को फंड के लिए करना होगा ज्यादा भुगतान

जैसे कि आप देख सकते हैं, भारतीय बाजार की भी भविष्य में रेट हाइक और इकोनॉमी में इंटरेस्ट रेट के फ्यूचर को लेकर यूएस फेड से मिलने वाले संकेतों पर नजर रखते हैं। अब यह लगभग तय हो गया है कि इजी मनी की पॉलिसी (easy money policy) अब जल्द ही बीते दिनों की बात बन जाएग। इसका मतलब है कि लिक्विडिटी घट जाएगी। इसका यह भी मतलब है कि कंपनियों को फंड्स के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा।


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भारत में फॉरेन फंड तक सीमित रहेगा असर

भारत की कभी इतनी ज्यादा राहत देने और इकोनॉमी में जीरो इंटरेस्ट रेट्स का सिस्टम लाने की इच्छा नहीं थी। इस प्रकार भारतीय बाजार पर इसका प्रभाव फॉरेन फंड की भागीदारी तक सीमित रहेगा। फॉरेन फंड के पास अब कम रिक्स वाले बॉन्ड्स में निवेश करने और ज्यादा कमाई का ऑप्शन होगा। ऐसे में, क्या विदेशी फंड भारतीय इक्विटी मार्केट से निकल जाएंगे? बिल्कुल नहीं। ये फंड एक बार फिर से सुरक्षित दांव लगाएंगे।

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भारतीय बाजार का बिगड़ेगा सेंटीमेंट

यूएस मार्केट में दबाव बना रहने का अनुमान है और इसका असर भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ेगा। ऐसे में, म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स जो अमेरिकी स्टॉक्स और इंडेक्स में निवेश कर रहे हैं, उन्हें कुछ मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

करेक्शन और कंसॉलिडेशन से गुजरेगा बाजार

अब, आखिरकार भारतीय म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए? दरअसल बाजार के करेक्शन और कंसॉलिडेशन से गुजरने का अनुमान है। ऐसे में ज्यादा वैल्युएशन वाले स्टॉक्स की पिटाई हो सकती है। ज्यादा वैल्युएशन वाली कंपनियों में निवेश करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कुल मिलाकर, इनवेस्टर्स को महामारी के दौरान लचीलापन दिखाने वाली कंपनियों पर भरोसा है। उनका मानना है कि बाजार में ऐसी कंपनियों को अच्छा सपोर्ट मिलेगा।

सुरक्षित निवेश का है समय

कुल मिलाकर, यदि आप अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर अच्छी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश कर रहे हैं तो अपना निवेश जारी रखिए। याद रखिए, यह सुरक्षित निवेश का समय है। साहसी न बनें और रिटर्न हासिल करने का प्रयास करें।

 

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