Acevector IPO Listing: एसेट-लाइट डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम चलाने वाली स्नैपडील (Snapdeal) के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में भारी डिस्काउंट के साथ एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 5 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹32 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹28.30 और NSE पर ₹28.32 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि लिस्टिंग पर 11% से अधिक पूंजी ही घट गई। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर BSE पर यह ₹27.38 (Snapdeal Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 14.44% घाटे में हैं।
Snapdeal IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
ऐसवेक्टर का ₹420 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 25-29 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 5.07 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.42 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 8.53 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 4.83 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹287 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले ₹133 करोड़ के 4,15,62,500 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹132.00 करोड़ मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन, ₹50.00 करोड़ टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट, ₹49.86 करोड़ इनऑर्गेनिक ग्रोथ और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹49.86 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।
स्नैनडील (Snapdeal), यूनीकॉमर्स (unicommerce) और स्टेलरो ब्रांड्स (Stellaro Brands) की पैरेंट कंपनी ऐसवेक्टर ई-कॉमर्स, ई-कॉमर्स सॉफ्टवेयर और कंज्यूमर ब्रांड्स सेगमेंट में काम करती है। इसका फोकस टियर-2 और उससे छोटे शहरों पर है और वित्त वर्ष 2026 में इसने देश भर के 18,792 पिन कोड में अपनी सर्विसेज दी। इसका स्नैपडील ग्राहक और सेलर को जोड़ने वाला मार्केटप्लेस है तो यूनिवेयर, कंवर्टवे और शिपवे ई-कॉमर्स एनेबलमेंट SaaS बिजनेसेज हैं तो इसकी स्टेलरो ब्रांड्स कंपनी की कंज्यूमर ब्रांड्स वाला हिस्सा है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार घाटे में चल रही है लेकिन टोटल इनकम में इजाफा हो रहा है। वित्त वर्ष 2024 में इसका शुद्ध घाटा ₹51.30 करोड़ का था जोकि वित्त वर्ष 2025 में तेजी से बढ़कर ₹126.31 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन फिर अगले ही वित्त वर्ष 2026 में स्थिति सुधरी और यह घटकर ₹45.51 करोड़ रह गया। हालांकि इस दौरान टोटल इनकम सालाना 18% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹537.67 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹56.99 करोड़ पड़े थे।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।