RBI के बाद US FED ने भी अपने बेंचमार्क लेंडिंग रेट में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। महंगाई से निपटने के लिए यूएस फेड मे अपनी अहम दरों में 2 दशकों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है। इसके अलावा हर महीने 95 बिलियन डॉलर की बॉन्ड खरीद घटाने का भी फैसला लिया गया है। फेड चेयरमैन ने कहा है कि कमेटी एक बार में ही दरों में 75 बेसिस प्वाइंट यानी 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी पर विचार नहीं कर रही है।
यूएस फेड द्वारा की गई इस बढ़ोतरी से इसकी मुख्य दरें 0.5 फीसदी से 1 फीसदी की रेंज में आ गई हैं जो कोरोना महामारी के शुरू होने के पिछले 2 साल की सबसे उच्च दर है। साल 2000 के बाद 0.50 फीसदी की यह सबसे भारी बढ़ोतरी इस बात के संकेत हैं कि यूएस फेड आगे दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके अलावा यूएस फेड ने ये भी कहा है कि वो जल्द ही अपने 9 लाख करोड़ डॉलर बैलेंस सीट में कटौती शुरू करेगा। बता दें कि फेड की बैलेंस सीट में मुख्यत: ट्रेजरी और मॉर्गेज बॉन्ड शामिल हैं।
इन दोनों की होल्डिंग कोरोना महामारी के बाद आई मंदी में दोगुना से ज्यादा बढ़ी है। फेड ने लॉन्ग टर्म बॉरोइंग रेट को निचले स्तर पर बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में इस तरह के बॉन्ड खरीदे थे। बता दें कि यूएस फेड द्वारा बॉन्ड होल्डिंग घटाने से इकोनॉमी में कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी होती नजर आएगी। जिससे बाजार में उपलब्ध लिक्विडिटी कम होगी और महंगाई पर काबू किया जा सकेगा।
निष्कर्ष के तौर पर कहें कि फेड की इस कठोर मौद्रिक नीति का मतलब ये है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से तमाम उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। मार्गेज, क्रेडिट कार्ड और ऑटो लोन जैसे तमाम कर्ज महंगे हो जाएंगे। गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका में खाने-पीने की चीजों, एनर्जी और कंज्यूमर गुड्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। लोगों को खर्च करने की क्षमता को कम करने और इस महंगाई को रोकने के लिए ही यूएस फेड ने दरों में बढ़त का फैसला लिया है।
यूएस फेड को उम्मीद है कि कर्ज लागत की बढ़ोतरी से लोगों की खर्च करने की क्षमता में गिरावट होगी। जिससे महंगाई बढ़ने से रोकी जा सकेगी। लेकिन दरों में जितनी बढ़ोतरी की गई, उससे इकोनॉमिक ग्रोथ पर इतना असर नहीं पड़ेगा कि जिससे मंदी आ जाए। बता दें कि अमेरिका में महंगाई दर 40 साल की ऊंचाई पर है।
फेड चेयरमैन जोरेम पावेल ने अपने बयान में कहा है कि आगे भी ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी संभव है। लेकिन एक बार में 75 बेसिस प्वाइंट दरें बढ़ाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।
अधर सिर्फ आधा फीसदी दरें बढ़ने से अमेरिकी बाजार झूम गए हैं। बता दें की ये बढ़ोतरी बाजार के उम्मीद के मुताबिक ही रही है। कल के कारोबार में DOW में 932 अंकों की जोरदार रैली दिखी। 2020 के बाद S&P 500 में भी सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला। इधर SGX NIFTY में भी 150 अंकों की तेजी देखने को मिल रही है। बाकी एशियाई बाजारों में भी रौनक है।
फेड के फैसले और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से गोल्ड की चमक बढ़ी है। सोने का भाव 1900 डॉलर के पार निकल गया है। उधर रूसी तेल पर यूरोपीय युनियन के बैन की आशंका से कच्चे तेल का भाव 111 डॉलर के पार निकल गया है।