रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार 4 मई को मॉनिटरी पॉलिसी में अहम बदलावों की अचानक से घोषणा कर सभी को हैरान कर दिया। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट को तत्काल प्रभाव से 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी करने का फैसला किया था। इसके साथ ही RBI ने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी 50 फीसदी बढ़ाकर 4.50 फीसदी करने का फैसला किया है।
शक्तिकांत दास ने CRR में बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए कहा, "कैश रिजर्व रेशियो में बढ़ोतरी के फैसले से बैंकिंग सेक्टर में करीब 83,711.55 करोड़ रुपये कैश कम हो सकते हैं।" दरअसल बैंकों को अपने अपनी कुल जमा राशि का एक निर्धारित हिस्सा RBI के पास जमा रखना पड़ता है, इसी को कैश रिजर्व रेशियो कहा जाता है। RBI यह पैसा इसलिए रखता है ताकि अगर कभी किसी बैंक से भारी तादाद में ग्राहकों पैसे निकालने लगे तो बैंक पैसा चुकाने से मना न कर सके।
21 मई से लागू होगी बढ़ोतरी
RBI ने यह अप्रत्याशित कदम अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की तरफ ले ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने के ठीक पहले किया है। इसके अलावा देश में बढ़ती खुदरा महंगाई ने भी RBI को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने अपने पिछली बैठक में उदार रूख को वापस लेने के इरादे की घोषणा की थी और उसके आज के फैसले को इसी संदर्भ में देखना चाहिए।
शक्तिकांत दास ने कहा, "मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि मॉनिटरी पॉलिसी कार्रवाई का उद्देश्य महंगाई में बढ़ोतरी को रोकना और इसे एक निश्चित दायरे में लाना है।" उन्होंने कहा, "अधिक महंगाई दर को विकास के लिए हानिकारक माना जाता है।"
कोरोना महामारी की 2022 में शुरुआत के बाद से यह पहला मौका है जब RBI ने अचानक से ब्याज दरों को लेकर फैसला किया है। RBI के इस फैसले बाजार भी बुधवार को हैरान दिखा और बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी के साथ शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली।