Daily Voice: इकोनॉमी तेजी के मूड में, बाजार में किसी भी पुलबैक को खरीदारी के मौके के तौर पर भुनाएं

वर्तमान ग्लोबल स्थितियों में बाजार में किसी पुलबैक (गिरावट) की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन इस तरह के किसी भी पुल बैक में भारतीय बाजारों में अच्छे शेयरों को खरीदने को मौका होगा

अपडेटेड Aug 17, 2022 पर 2:28 PM
महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नीयर टर्म चुनौतियों के बावजूद भारत टिकाऊ इकोनॉमिक रिकवरी के दहलीज पर है

क्वांटम एडवाइजर्स (Quantum Advisors) के अरविंद चारी (Arvind Chari) का कहना है कि महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नीयर टर्म चुनौतियों के बावजूद भारत टिकाऊ इकोनॉमिक रिकवरी के दहलीज पर है। इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट का 18 सालों का अनुभव रखने वाले अरविंद चारी का मानना है कि सरकारी और कॉर्पोरेट खर्च में आ रही तेजी। कंपनियों और बैंकों की बैलेंस शीट में आ रही मजबूती। आवासीय रियल स्टेट में आ रही तेजी और नई नौकरियों की संख्या में बढ़त का मतलब है कि आगे अर्थव्यवस्था में तेजी देखने को मिलेगी। कंपनियों के हाल में आए नतीजे भी इकोनॉमी में रिकवरी की ओर इशारा कर रहे हैं। अरविंद चारी ने ये बातें हाल में मनी कंट्रोल को दिए गए एक इंटरव्यू में कही हैं।

उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि वर्तमान ग्लोबल स्थितियों में बाजार में किसी पुलबैक (गिरावट) की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन इस तरह के किसी भी पुल बैक में भारतीय बाजारों में अच्छे शेयरों को खरीदने को मौका होगा।

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महंगाई से जुड़ी चिंता पर बात करते हुए अरविंद चारी ने कहा कि अमेरिका में दिख रही महंगाई मांग आधारित महंगाई है। अमेरिका में सरकार ने आम लोगों को कोविड के बाद की स्थिति में राहत देने के लिए ब्याज दरें कम रखी और लोगों की आय बढ़ाने के उपाय किए। जिसके चलते गुड्स और सर्विसेज का मांग बढ़ी। इसके चलते महंगाई आई। आज अमेरिकी में वेतन बढ़ रहा है और बेरोजगारी भी बहुत कम है। अमेरिका में नियर टर्म में सप्लाई के कारण बनी दिक्कत कम हो सकती है। हालांकि अमेरिका महंगाई पर जीत का दावा नहीं कर सकता। ऐसे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जल्द राहत नहीं मिलने वाली है।

लेकिन में भारत में स्थिति कुछ दूसरी है अपेक्षाकृत उच्च बेरोजगारी, कोविड के दौरान ज्यादा इनकम सपोर्ट न मिलने और उद्योगों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को देखते हुए हमें भारत में व्यापक और मांग आधारित महंगाई की संभावना नहीं दिखती। ऐसे में अगर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आती है तो हमें उम्मीद करनी चाहिए कि भारत की महंगाई दर 6 फीसदी बैंड के भीतर रहेगी। इसके अलावा भारत खाद्य उत्पादों में भी काफी हद तक आत्मनिर्भर है और इसलिए दुनिया में खाने-पीने की चीजों की उच्च महंगाई से भारत आसानी से निपट लेगा। हालांकि आरबीई अभी अपने रुख में नरमी नहीं लाएगा। लेकिन उसको महंगाई से निपटने के लिए बहुत आक्रामक तरीके से दरों में बढ़त करने की भी जरूरत नहीं है।

बाजार पर बात करते हुए अरविंद चारी ने आगे कहा कि बाजार ये मान कर चल रहा है कि कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और बेस इफेक्ट के चलते महंगाई में वर्तमान स्तरों से गिरावट देखने को मिलेगी। बाजार ये भी अनुमान लगा रहा है कि इकोनॉमी में मंदी की संभावना को देखते हुए यूएस फेड न केवल दरों में की जा रही बढ़ोतरी को रोकेगा बल्कि 2023 में दरें घटाएगा भी। ऐसे में इस समय बाजार में रेट हाइक को लेकर कोई दबाव देखने को नहीं मिल रहा है।

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