एमएससीआई इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में 12 नए शेयर शामिल हो सकते हैं, जबकि एक शेयर बाहर हो सकता है। ऐसा होने पर शामिल होने वाले नए शेयरों में करीब 3.2 अरब डॉलर का पैसिव निवेश आ सकता है। जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी है। ब्रोकरेज फर्म ने बताया है कि इस इंडेक्स में बीते दो सालों में इंडिया के वेटेज में काफी कमी आई है। इसलिए इंडेक्स में मामूली बदलाव का भी फंड फ्लो पर बड़ा असर दिख सकता है। एमएससीआई हर तिमाही इंडेक्स को रिव्यू करती है। अगस्त में यह रिव्यू हो सकता है।
3.3 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो
MSCI की तिमाही रीबैलेंसिंग पर मार्केट की करीबी नजरें रहती हैं। खासकर इंडिया फोकस्ड पैसिव इनवेस्टर्स इस पर करीबी नजर रखते हैं। जेएम फाइनेंशियल का अनुमान है कि इस रीबैलेंसिंग से करीब 3.4 अरब डॉलर का पैसिव इनफ्लो आ सकता है, जबकि करीब 15.9 करोड़ डॉलर का आउटफ्लो देखने को मिल सकता है। इनफ्लो और आउटफ्लो को एडजस्ट करने पर करीब 3.2 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो आ सकता है।
एथर एनर्जी का शेयर बन सकता है हिस्सा
इस रीबैलेंसिंग में Ather Energy के MSCI India Standard Index का हिस्सा बनने की उम्मीद है। यह शेयर मई 2005 में शेयर बाजार में 321 रुपये पर लिस्ट हुआ था। तब से इसके शेयरों में अच्छी तेजी आई है। 22 जून को शेयर 1.46 फीसदी कमजोरी के साथ 957.50 रुपये पर बंद हुआ। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि अगर एथर का शेयर इंडेक्स में शामिल होता है तो करीब 20.9 करोड़ डॉलर का पैसिव निवेश आ सकता है।
लेंसकार्ट सॉल्यूशंस भी बन सकता है हिस्सा
सरकारी स्टील कंपनी सेल के भी इंडेक्स में शामिल होने की संभावना है। इस कंपनी को महारत्न का दर्जा हासिल है। इसमें सरकार की 65 फीसदी हिस्सेदारी है। इस शेयर के इंडेक्स में शामिल होने पर करीब 188.8 करोड़ डॉलर का पैसिव निवेश आ सकता है। लेंसकार्ट सॉल्यूशंस का शेयर भी इंडेक्स का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है। कंपनी अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। FY26 में कंपनी की टोटल इनकम साल दर साल आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 8,988 करोड़ रुपये पहुंच गई।
कुछ शेयर स्मॉलकैप इंडेक्स से स्टैंडर्ड इंडेक्स में जा सकते हैं
Schaeffler India के भी इंडेक्स के शामिल होने की संभावना है। जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि इस कंपनी ने अपने ट्रेडिशनल बिजनेस में बड़ा बदलाव किया है। यह बड़ी मोशन टेक्नोलॉजी बनने के रास्ते पर चल रही है, जो ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रिल कस्टमर्स को सेवाएं दे रही है। अगर यह शेयर इंडेक्स में शामिल होता है तो करीब 15.7 करोड़ डॉलर का पैसिव निवेश दिख सकता है। लॉरस लैब्स और बायोकॉन एमएससीआई स्मॉल कैप इंडेक्स से निकलकर एमएससीआई इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स का हिस्सा बन सकते है।