ऑटो सेक्टर में आ रही सुस्ती? 7 लाख गाड़ियां फंसी, ₹73,000 करोड़ का नहीं बिका माल
Auto Sector: पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की बिक्री में आई सुस्ती ने ऑटो डीलर्स को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, ऑटो डीलर्स के पास मौजूद गाड़ियों का स्टॉक इस समय अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया है। करीब 7 लाख से ज्यादा गाड़ियां डीलर्स के पास फंसी हुई हैं, जिनकी कुल कीमत 73,000 करोड़ रुपये है
Auto Sector: ऑटो डीलर्स के पास इनवेंट्री का स्तर 60-65 दिन से बढ़कर 70-75 दिन पर पहुंच गया है
Auto Sector: पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की बिक्री में आई सुस्ती ने ऑटो डीलर्स को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, ऑटो डीलर्स के पास मौजूद गाड़ियों का स्टॉक इस समय अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया है। करीब 7 लाख से ज्यादा गाड़ियां डीलर्स के पास फंसी हुई हैं, जिनकी कुल कीमत 73,000 करोड़ रुपये है। FADA का दावा है कि जुलाई की शुरुआत में जो स्टॉक 65-67 दिनों का था, वह अब बढ़कर 70-75 दिनों तक पहुंच गया है। इससे डीलर्स पर दबाव बढ़ रहा है।
FADA के प्रेसिडेंट मनीष राज सिंघानिया ने कहा कि इससे डीलर्स पर दबाव बढ़ रहा है और इसलिए सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने पैसेंजर व्हीकल बनाने वाली कंपनियों से भी अपील किया है वे इनवेंट्री के इस ऊंचे स्तर को देखते हुए संभावित डीलर फेल्योर को लेकर सतर्क रहें।
सिंघानिया ने कहा, "कार कंपनियों को चाहिए कि वे अपने उत्पादन को रिटेल बिक्री के आंकड़ों के मुताबिक रीसेट करें। उन्हें डीलर्स को भेजी जाने वाली व्हीकल्स की संख्या घटानी चाहिए। हालांकि यह कमी एक महीने में नहीं हो सकती, लेकिन फिर भी (पैसेंजर व्हीकल) रिटेल और थोक आंकड़ों के बीच का अंतर 50,000 से 70,000 यूनिट्स होनी चाहिए?"
उनके मुताबिक, ऑटो डीलर्स के पास व्हीकल की इनवेंट्री औसतन 30 दिनों की होनी चाहिए और कुछ मामलों में इसे एक सप्ताह के लिए बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "कार कंपनियां आने वाले महीनों में अपने डिस्पैच को कम कर सकती है, लेकिनन फेस्टिस सीजन को देखते हुए सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत में वे इसे फिर से बढ़ा सकती हैं।"
बता दें कि FADA के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में 10 प्रतिशत की तेजी आई और यह 3,20,129 यूनिट्स तक पहुंच गया। हालांकि इसी महीने में पैसेंजर व्हीकल्स की थोक बिक्री सालाना आधार पर 2.5 प्रतिशत घटकर 3.41 लाख यूनिट्स रही।
सिंघानिया ने कहा, "अगर कार कंपनियों की सच में दिलचस्पी है तो उन्हें अपने डीलर्स की सेहत का ख्याल रखना चाहिए। उन्हें ऐसे प्रमोशनल स्कीम लाने चाहिए, जिससे वे इन गाड़ियों को मार्केट में निकाल सके। साथ ही उन्हें अतिरिक्त लागत के मोर्च पर भी हमें सपोर्ट करना चाहिए, जो गाड़ियो के स्टॉक को अधिक दिन तक रखने से आ रहा है। अगर वे इस अतिरिक्त लागत को उठाते हैं, तो उससे डीलर्ज के मार्जिन पर असर नहीं पड़ेगा।"
इस बारे में SIAM के प्रेसिडेंट विनोद अग्रवाल का कहना है कि सभी ऑटो निर्माता अपने डीलर्स की सेहत को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी से काम करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि कंपनियां जल्दी ही आवश्यक कदम उठाएंगी ताकि स्टॉक का बोझ डीलर्स पर ज्यादा न पड़े।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स जैसे कि रवि भाटिया और पुनीत गुप्ता का कहना है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों ने मजबूत मांग की उम्मीद में उत्पादन बढ़ा दिया था। लेकिन अब जब बाजार ठंडा पड़ रहा है, तो इनवेंट्री संभालना मुश्किल हो रहा है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने भी ग्राहकों पर दबाव डाला है, जिससे डिमांड और कमजोर हुई है।
लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि त्योहारी सीजन करीब आते ही यह स्थिति बदल सकती है। उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर तक स्टॉक में सुधार होगा, लेकिन इसके लिए उत्पादन को भी मांग के अनुसान तर्कसंगत बनाना होगा।
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