स्टॉक मार्केट में आज अगर आपका फोकस रिटर्न से ज्यादा सेफ्टी पर है तो आप बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं। इनाम होल्डिंग्स के इनवेस्टमेंट डायरेक्टर श्रीधर शिवराम ने यह सलाह दी है। मनीकंट्रोल की एन महालक्ष्मी से बातचीत में उन्होंने इनवेस्टमेंट और स्टॉक मार्केट्स को लेकर कई बातें बताईं। उन्होंने कहा कि बैंकों की प्रॉफिट ग्रोथ सालाना 12-15 फीसदी रहने की उम्मीद है। बैंकिंग स्टॉक्स की कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं के बराबर है। इसकी वजह यह है कि पिछले कुछ सालों में बैंकिंग शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
अर्निंग्स ग्रोथ 12-15 फीसदी रह सकती है
उन्होंने कहा कि बैंकों के स्टॉक्स (Banking Stocks) ने बीते 5 सालों में अच्छा रिटर्न नहीं दिए हैं। अगर आगे उनकी फिर से रेटिंग नहीं होती है तो भी उनकी अर्निंग्स ग्रोथ 12-15 फीसदी रहेगी। ऐसे में शेयरों में गिरावट की संभावना नहीं के बराबर है। अगर उनका कामकाज बेहतर रहता है तो उनकी प्रॉफिट ग्रोथ ज्यादा भी रह सकती है। उन्होंने माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) और छोटे NBFC को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। इसकी वजह लोन देने में उनका आक्रामक रुख है।
MFI और छोटे NBFC स्टॉक्स से दूर रहने में भलाई
शिवराम ने कहा कि माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अभी मुश्किल वक्त से गुजर रहा है। कस्टमर्स के मामले में ग्रोथ अच्छी नहीं है। इसके अलावा एक ही ग्राहक ने कई लोन लिए हैं। अगर आपने किसी ग्राहक को 5 या 6 लोन दिया है तो आप फिर उसे नया कैसे दे सकते हैं। ऐसा लोन करीब 1 लाख करोड़ रुपये का है, जो एक ही ग्राहक को कई बार दिया गया है। यह चिंता पैदा करने वाली बात है। इस सेगमेंट में नए कस्टमर्स नहीं दिख रहे हैं। कस्टमर्स ग्रोथ सिर्फ 3-4 फीसदी रही है, जबकि लोन ग्रोथ काफी ज्यादा रही है।
बड़े प्राइवेट बैंकों की लोन बुक अट्रैक्टिव
उन्होंने कहा कि बड़े प्राइवेट बैंक निवेश के लिए इसलिए अट्रैक्टिव दिख रहे हैं, क्योंकि उनकी लोन बुक अच्छी है और रिस्क मैनेजमेंट सही है। हालांकि, प्रॉफिट ग्रोथ पहले के सालों जितनी नहीं रहेगी। कुछ साल पहले बैंकों की प्रॉफिट ग्रोथ 20 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 15 फीसदी रह सकती है। इसके बावजूद, बैंकिंग शेयरों से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
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फाइनेंशियल सेक्टर की सेहत अच्छी
फाइनेंशियल सेक्टर की सेहत के बारे में शिवराम ने कहा कि अभी यह अच्छी दिख रही है। इनफ्लेशन काफी कम हो गया है और लिक्विडिटी को लेकर चिंता घटी है। RBI आगे मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकता है। इससे क्रेडिट की डिमांड बढ़ेगी। अगर फूड इनफ्लेशन बढ़ता है तो भी बेस इफेक्ट्स की वजह से आने वाले महीनों में इनफ्लेशन 4 फीसदी से कम बना रहेगा।