शेयर मार्केट में आनी वाली है बहुत बड़ी गिरावट, दिग्गज फंड मैनेजर माइकल बरी ने किया आगाह

माइकल बरी ने 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस के बारे में भी पहले ही बता दिया था। तब अमेरिका का हाउसिंग मार्केट धराशाई हो गया था। इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों सहित दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा था। भारतीय शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट आई थी

अपडेटेड Aug 05, 2026 पर 5:51 PM
माइकल बरी ने मार्केट क्रैश का अनुमान तब जताया है, जब अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक S&P500 और Nasdaq नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं।

शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आने वाली है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टर और फंड मैनेजर माइकल बरी ने यह कहा है। खास बात यह है कि बरी ने 2008 में आई फाइनेंशियल क्राइसिस के बारे में भी पहले ही बता दिया था। तब अमेरिका का हाउसिंग मार्केट धराशाई हो गया था। इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों सहित दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा था। भारत के शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट आई थी।

1987 के मार्केट क्रैश जैसी गिरावट आने वाली है

बरी ने कहा है कि अमेरिकी शेयर बाजारों में जो जबर्दस्त तेजी दिख रही है, उसका अंत बड़ी गिरावट के साथ हो सकता है। उन्होंने कहा है कि यह गिरावट 1987 के स्टॉक मार्केट क्रैश जैसी होगी। बरी ने सबप्राइम मॉर्टगेज क्रैश करने के बारे में पहले ही बता दिया था। 'बिग शॉट' में उनके पूर्वानुमान को दिखाया गया है। फिर से उन्होंने बाजार में बड़ी गिरावट का अनुमान जताया है।


अमेरिकी बाजारों के प्रमुख सूचकांक ऑल-टाइम हाई पर

Substack Post में उन्होंने बाजार के बारे में अपना नजरिया बताया है। उन्होंने मार्केट क्रैश का अनुमान तब जताया है, जब अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक खासकर S&P500 और Nasdaq नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। 4 अगस्त को एसएंडपी500 1.9 फीसदी चढ़ा। इससे यह ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। नैस्डेक भी 2.7 फीसदी के उछाल के साथ नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर है।

अमेरिकी शेयर बाजार नए टॉप के काफी ज्यादा करीब

शेयर बाजारों में जारी तेजी के बीच बरी ने कहा कि बाजार के प्रमुख सूचकांक पीक की तरफ बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा अब भी यह मानना है कि संभवत: मार्केट्स नए टॉप के करीब हैं। बड़ी गिरावट आने से पहले एसएंडपी500 में तेजी जारी रहेगी, जिससे शेयरों में निवेश और बढ़ेगा। फिर मार्केट की चाल पलट जाएगी।"

वोलैटिलिटी घटने से मार्केट में आ रहा है नया निवेश 

बरी के मुताबिक, इस तेजी को बाजार में उतार-चढ़ाव में कमी से हवा मिल रही है। वोलैटिलिटी घटने से सिस्टमैटिक और वोलैटिलिटी-टारगेटिंग फंड्स शेयरों में निवेश बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वोलैटिलिटी घटने से ऐसे फंड्स बाजार में पोजीशन बढ़ाते हैं। उधर, मोमेंटम-आधारित स्ट्रेटेजी से खरीदारी बढ़ जाती है। इससे सेंटीमेंट बदलते ही मार्केट में बड़ी गिरावट आती है।

19 अक्टूबर, 1987 को डाओ जोंस 22 फीसदी क्रैश कर गया था

उन्होंने कहा कि लेवरेज (leverage) बढ़ने से मार्केट में बड़ी गिरावट का डर उसी तरह से बढ़ गया है, जैसी गिरावट 1987 के मार्केट क्रैश में दिखी थी। 19 अक्तूबर, 1987 के दिन को 'Black Monday' कहा जाता है। तब Dow jones Industrial Average (DJIA) एक दिन में 22.61 फीसदी क्रैश कर गया था। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की वैल्यू एक दिन में 500 अरब डॉलर घट गई थी। इसे अमेरिकी मार्केट के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट माना जाता है।

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आर्टफिशियल इंटेलिजेंस शेयरों की बदौलत आई तेजी टिकाऊ नहीं 

बरी अमेरिकी बाजार में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शेयरों की बदौलत आई तेजी को अच्छा नहीं मानते हैं। वह कहते रहे हैं कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड को फाइनेंसिंग अरेंजमेंट से सपोर्ट मिल रहा है, जो लंबे समय तक जारी नहीं रह सकता। हालांकि, उन्होंने ऐसी कई कंपनियों और ईटीएफ में शॉर्ट पोजीशंस बनाए हैं। लेकिन, उनका मानना है कि हवा का रुख बदलते ही वे अपनी पोजीशंस खत्म कर देंगे।

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