लेंसकार्ट पर 'बिंदी-तिलक' का बवाल, धार्मिक भेदभाव के आरोपों में घिरी कंपनी

सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि लेंसकार्ट में धार्मिक भेदभाव किया जा रहा है। कर्मचारियों को बिंदी,कलावा और तिलक लगाने की मनाही है। कंपनी के वर्करों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू किया गया है। महिला कर्मचारी माथे पर बिंदी नहीं लगा सकतीं

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 11:16 AM
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पीयूष बंसल की X पर सफाई आई है। जिसमें कहा गया है कि डॉक्यूमेंट मौजूदा गाइडलाइन को नहीं दिखाता है। सोशल मीडिया पर गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल है

लेंसकार्ट भी धार्मिक भेदभाव के आरोपो में फंसती दिख रही है। कंपनी की ड्रेस कोड पॉलिसी को लेकर सोशल मीडिया में बबाव मचा हआ है। कंपनी पर हिंदू प्रतीको की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि लेंसकार्ट में धार्मिक भेदभाव किया जा रहा है। कर्मचारियों को बिंदी,कलावा और तिलक लगाने की मनाही है। कंपनी के वर्करों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू किया गया है। महिला कर्मचारी माथे पर बिंदी नहीं लगा सकतीं। अगर कोई सिंदूर लगाता है तो वह बहुत कम होना चाहिए। हाथ में पहने जाने वाले कलावा पर भी पाबंदी है। इसे भेदभाव इसके लिए भी कहेंगे कि जो हमारे सिख भाई हैं वो अगर पगड़ी पहनना चाहते हैं तो सिर्फ काले रंग की पहनेंगे। लेकिन दूसरी तरफ हिजाब के ऊपर यहां पर कोई भी पाबंदी देखने को नहीं मिल रही है।

पीयूष बंसल की X पर सफाई

इस बीच लेंसकार्ट के मुखिया पीयूष बंसल की X पर सफाई आई है। जिसमें कहा गया है कि डॉक्यूमेंट मौजूदा गाइडलाइन को नहीं दिखाता है। सोशल मीडिया पर गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल है। यह डॉक्यूमेंट कंपनी की मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दिखाता। कंपनी में बिंदी-तिलक पर कोई रोक नहीं है। कंपनी की 'ग्रूमिंग पॉलिसी' समय के साथ विकसित हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट से जो भ्रम और चिंता पैदा हुई है,उसके लिए हम माफी मांगते हैं।


कंपनी दबे शब्दों में तो यही कहना चाहती है कि सोशल मीडिया पर वायरल पॉलिसी पुरानी है और जैसे-जैसे कंपनी इवॉल्व होती चली गई वैसे-वैसे इसमें बदलाव देखने को मिला है। बंसल सोशल मीडिया की रिपोर्ट को पूरी तरीके से गलत बता रहे हैं। वह यह भी कह रहे हैं कि कंपनी में कोई भेदभाव नहीं होता।

X पर कम्युनिटी पोस्ट

लेकिन X प्लेटफार्म अपने आप में बड़ा खास है। अगर कोई भी ऐसी विवादित चीज होती है जहां पर बरगलाया जाता है या गलत जानकारी दी जाती है तो उस पर तुरंत कम्युनिटी पोस्ट आ जाती है। पीयूष बंसल ने जो सफाई दी है इस पर भी कम्युनिटी पोस्ट आ गई है। इस कम्युनिटी पोस्ट में ये कहा गया है कि ये तो हाल ही की पॉलिसी है। अब तक इस पॉलिसी के बाद कोई दूसरी पॉलिसी कंपनी की तरफ से अपलोड नहीं की गई। यानी भेदभाव से भरी ये पॉलिसी आज भी जायज है।

 

 

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