Biocon share price : डायबिटीज की दवा को लेकर अमेरिका में कंपीटिशन बढ़ा, बायोकॉन के कारोबार पर कितना होगा असर?

Biocon news: बायोकॉन भी इंसुलिन एस्पार्ट बायोसिमिलर पर काम कर रहा है। बायोकॉन के इंसुलिन एस्पार्ट को USFDA से मंजूरी मिलना बाकी है। बायोकॉन इंसुलिन एस्पार्ट का मार्केट साइज अमेरिका में 65.1 करोड़ डॉलर और अन्य देशों में 128.7 करोड़ डॉलर का हो सकता है। बायोकॉन ने US में इंसुलिन एस्पार्ट के लिए आवेदन किया है

अपडेटेड Feb 17, 2025 पर 4:36 PM
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Biocon share : बायोकॉन की चाल पर नजर डालें तो ये शेयर 1.80 रुपए यानी 0.52 फीसदी की कमजोरी के साथ 347.55 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का लो 338 रुपए है

Biocon share : डायबिटीज की दवा को लेकर अमेरिका में कंपीटिशन बढ़ता दिख रहा है। क्योंकि सनोफी की बायोसिमिलर दवा MERILOG को US FDA से मंजूरी मिल चुकी है। वहीं बायोकॉन की दवा को मंजूरी मिलना बाकी है। MERILOG से बायोकॉन के कारोबार पर क्या असर पड़ेगा इस पर नजर डालें तो US में डायबिटीज की दवा बायोसिमिलर को लेकर कंपीटिशन बढ़ता दिख रहा है। USFDA से सनोफी-एवेंटिस के MERILOG दवा को मंजूरी मिल गई है। MERILOG सनोफी-एवेंटिस की डायबिटिक दवा है। MERILOG को 3 कैटेगरी में लॉन्च करने की मंजूरी मिली है।

उधर बायोकॉन भी इंसुलिन एस्पार्ट बायोसिमिलर पर काम कर रहा है। बायोकॉन के इंसुलिन एस्पार्ट को USFDA से मंजूरी मिलना बाकी है। बायोकॉन इंसुलिन एस्पार्ट का मार्केट साइज अमेरिका में 65.1 करोड़ डॉलर और अन्य देशों में 128.7 करोड़ डॉलर का हो सकता है। बायोकॉन ने US में इंसुलिन एस्पार्ट के लिए आवेदन किया है। FDA से मंजूरी के बाद इंसुलिन एस्पार्ट का लॉन्च संभव है। बायोकॉन के पहले सनोफी और एली लिली यूरोप में बायोसिमिलर लॉन्च कर चुके हैं।

बायोकॉन की चाल पर नजर डालें तो ये शेयर 1.80 रुपए यानी 0.52 फीसदी की कमजोरी के साथ 347.55 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का लो 338 रुपए और दिन का हाई 352.85 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक लो 244.55 रुपए और 52 वीक हाई 404.70 रुपए है। इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 2,798,914 के आसपास और मार्केट कैप 41,726 करोड़ रुपए है।


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फार्मा आयात पर टैरिफ लगाने की संभावना के कारण हाल के दिनों फार्मा पर दबाव देखने को मिला है। यह तब हुआ जब ट्रंप ने अमेरिका में स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी और कहा कि इसी तरह के टैरिफ फार्मास्यूटिकल्स,ऑयल और सेमीकंडक्टर सहित अन्य वस्तुओं पर भी लागू होंगे।

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अगर ट्रंप अमेरिका में फार्मा आयात पर टैरिफ लगाते हैं, तो यह भारतीय दवा निर्माताओं के लिए बहुत बड़ा झटका हो सकता है। टैरिफ से अमेरिका को दवाओं के निर्यात की लागत बढ़ जाएगी, जिससे सन फार्मा, डॉ रेड्डीज और सिप्ला जैसी भारतीय दवा कंपनियों के मार्जिन में कमी आ सकती है, जिनका अमेरिकी जेनेरिक बाजार में अच्छा खासा दखल है।

 

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