BlackRock के लैरी फिंक ने कहा-बाजार ईमानदार, कोई इकोनॉमी या व्यक्ति इससे बड़ा नहीं

ब्लैकरॉक के चेयरमैन एवं सीईओ लैरी फिंक ने कहा कि किसी एक दिन या एक हफ्ते मार्केट्स कैलकुलेशन में गलती कर सकते हैं, लेकिन आखिर में वे खुद को करेक्ट करते हैं और समय के साथ रीबैलेंस करते हैं। राजनीतिक दबाव का असर मार्केट्स पर सिर्फ कुछ समय के लिए पड़ सकता है

अपडेटेड Feb 04, 2026 पर 9:48 PM
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फिंक ने कहा लंबे समय में मार्केट आईना की तरह काम करता है।

ब्लैकरॉक के चेयरमैन एवं सीईओ लैरी फिंक ने मार्केट्स के बारे में कई बड़ी बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल मार्केट्स लॉन्ग टर्म में ग्लोबल इकोनॉमी की हकीकतों का सबसे भरोसेमंद प्रतिबिंब है। उन्होंने इनवेस्टर्स को शॉर्ट टर्म में राजनीतिक उथल-पुथल या रोजाना बाजार के उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देने की सलाह दी। मुंबई में 4 फरवरी को जियो ब्लैकरॉक के एक कार्यक्रम के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं।

राजनीतिक दबाव का असर सिर्फ कुछ समय के लिए 

Larry Fink ने कहा, "बाजार ईमानदार होते हैं।" उन्होंने कहा कि किसी एक दिन या एक हफ्ते मार्केट्स कैलकुलेशन में गलती कर सकते हैं, लेकिन आखिर में वे खुद को करेक्ट करते हैं और समय के साथ रीबैलेंस करते हैं। राजनीतिक दबाव का असर मार्केट्स पर कुछ समय के लिए पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में फंडामेंटल्स को यह प्रभावित नहीं कर सकता।


मार्केट्स किसी व्यक्ति या इकोनॉमी से बड़े होते हैं

उन्होंने कहा, "किसी एक तरह या दूसरे तरह का राजनीतिक दबाव एक दिन या एक हफ्ते तक मार्केट को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सच यह है कि मार्केट्स किसी व्यक्ति या इकोनॉमी से बड़े होते हैं।" उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के एक्शंस, रोजाना ट्रेडिंग में उतारचढ़ाव और मीडिया की खबरों जैसे शॉर्ट टर्म के घटनाक्रम पर बहुत ज्यादा फोकस से ज्यादा असर वाले स्ट्रक्चरल मसलों से ध्यान भटक जाता है। इनका असर खबरों की दुनिया पर पड़ता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये मायने नहीं रखते।

निगेटिव खबरें ज्यादा दिखती हैं, क्योंकि वे ध्यान खींचती हैं

फिंक ने कहा लंबे समय में मार्केट आईना की तरह काम करता है। यह ग्लोबल इकोनॉमीज में होने वाली घटनाओं, इनफ्लेशन एडजस्टेमेंट और पॉलिसी से जुड़ी गलतियों को एक आइने की तरह दिखाता है। राजनीतिक धुव्रीकरण के बीच खुद को करेक्ट करने की मार्केट की प्रवृत्ति की अक्सर अनदेखी की जाती है। उन्होंने कहा कि आज नेगिटिव खबरें ज्यादा दिखती हैं, क्योंकि वे ज्यादा ध्यान खींचती हैं।

सतत इकोनॉमिक ग्रोथ डेफिसिट कम करने का कारगर तरीका

उन्होंने कहा कि वह लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, क्योंकि उन पर खासकर विकसित इकोनॉमीज में बढ़ते फिस्कल डेफिसिट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। सतत इकोनॉमिक ग्रोथ डेफिसिट कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं को उन पॉलिसीज पर फोकस करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनका संबंध शॉर्ट टर्म प्रेशर को कम करने की जगह ग्रोथ बढ़ाने पर होता है।

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वैश्विक टकराव के बावजूद कुछ इलाकों में रिस्क घटा है

फिंक ने कहा कि वैश्किव टकराव और अनिश्चितता के बावजूद कुछ इलाकों में रिस्क घटा है, भले ही लोगों की अवधारणा अलग है। उन्होंने कहा कि बाजार का प्रदर्शन और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट इस बात के सबूत हैं कि डर अक्सर हकीकत पर भारी पड़ता है। उन्होंने लंबी अवधि को लेकर आशावान बने रहने की सलाह देते हुए कहा कि जो इनवेस्टर्स इनसान की खुद को बदलने की क्षमता और इनोवेशन में भरोसा रखते हैं उन्हें अच्छे नतीजे मिलते हैं।

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