बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेबी को आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज को भेजे गए एग्जेम्प्शन लेटर के बारे में बताने का आदेश दिया है। सेबी ने इस लेटर में आईसीआईसीआई सिक्टोरिटीज को डीलिस्टिंग के लिए रिवर्स बुक-बिल्डिंग प्रोसेस से छूट दी थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि सेबी को निश्चित रूप से यह लेटर अरुणा विनोद मोदी को उपलब्ध कराना होगा। मोदी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की शेयरहोल्डर थीं। उन्होंने सेबी की तरफ से कंपनी को दिए गए इस छूट को कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका मानना है कि सेबी ने यह छूट देकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। बाजार नियामक ने डीलिस्टिंग के नियमों का उल्लंघन किया है।
एनसीएलटी में एक दूसरा मामला भी चल रहा
इसके अलावा एक दूसरा मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में चल रहा है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक पर आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) की डीलिस्टिंग के लिए शेयरधारकों को प्रभावित करने का आरोप है। 83.8 फीसदी पब्लिक इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स और 32 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स ने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की डीलिस्टिंग के पक्ष में मतदान किया था।
आईसीआईसीआई बैंक के एंप्लॉयीज पर आरोप
शेयरहोल्डर्स का कहना है कि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के एंप्लॉयीज की जगह आईसीआईसीआई बैंक के एंप्लॉयीज ने पब्लिक शेयरहोल्डर्स से संपर्क कर उन्हें डीलिस्टिंग के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिए मनाया था। इसके लिए एक प्रजेंटेशन का इस्तेमाल किया गया था, जिसे समझना शेयरहोल्डर्स के लिए मुश्किल था। इससे पहले इसी तरह का एक मामला मुंबई एनसीएलटी में फाइल किया गया था।
सेबी ने एक एडमिनिस्ट्रेटिव वार्निंग जारी की थी
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के कई शेयरहोल्डर्स की ऐसी शिकायत मिलने के बाद सेबी ने इस साल की शुरुआत में आउटरिच पर एक एडमिनिस्ट्रेटिव वार्निंग जारी की थी। निवेशकों की शिकायत में कहा गया था कि कुछ अधिकारी आउटरिच प्रोग्राम से परे चले गए थे। उन्होंने कई बार कॉल की थी और यहां तक कि वोटिंग की स्क्रीनशॉट भी मांगे थे। आईसीआईसीआई बैंक को सेबी के लेटर में कहा गया था, "...बैंक के एक प्रमोटर/इंटरेस्टेड पार्टी होने के नाते, आई-सेक के शेयरहोल्डर्स को प्रस्तावित ट्रांजेक्शन के बारे में अपनी राय देने को एक बैलेंस्ड फैक्चुअल पॉजिशन नहीं माना जा सकता। साफ तौर पर यह हित का टकराव था।"
आईसीआईसीआई बैंक को सावधान रहने की नसीहत
सेबी ने आईसीआईसीआई बैंक को सावधानी बरतने की नसीहत दी थी। उसने यह भी कहा था कि उम्मीद की जाती है कि इस तरह के मामले से बचने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से कंप्लायंस स्टैंडर्ड में इम्प्रूवमेंट करने की उम्मीद की जाती है। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकती है।