Crude-sensitive stocks : सोमवार 9 मार्च को क्रूड ऑयल के प्रति संवेदनशील स्टॉक्स पर भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन),स्पाइसजेट और एशियन पेंट्स के शेयर 8 फीसदी तक गिर गए है। क्रूड ऑयल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं हैं। क्रूड ऑयल में तेज उछाल से इनपुट कॉस्ट बढ़ने और महंगाई का दबाव फिर से बढ़ने का डर बढ़ गया है। इसी डर के चलते आज इन शेयरों क भारी पिटाई हो रही है।
एविएशन और टायर शेयरों को लगा झटका
सबसे ज़्यादा नुकसान इंडिगो के शेयरों में हुआ है। ये 7 फीसदी से ज़्यादा टूट गया है। जबकि स्पाइसजेट के शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग 6 फीसदी गिरे थे। टायर बनाने वाली कंपनियों में भी भारी नुकसान देखने को मिल रहा है। जेके टायर में लगभग 6.5 फीसदी और अपोलो टायर्स में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई है। कच्चे माल और फ्यूल की बढ़ती कीमतों का असर इन शेयरों पर दिखा है।
पेंट कंपनियों के शेयर 3-4 फीसदी टूटे
पेंट कंपनियां कच्चेमाल के लिए क्रूड डेरिवेटिव्स पर बहुत ज़्यादा निर्भर होती हैं। इसके चलते उन पर भी दबाव आया है। एशियन पेंट्स 4 फीसदी से ज़्यादा गिरा है। जबकि, बर्जर पेंट्स,कंसाई नेरोलैक और अक्ज़ो नोबेल इंडिया 3 से 4 फीसद के बीच गिरे हैं।
फिलहाल 11.10 बजे के आसपास सेंसेक्स करीब 2,401 अंक या 3.04 फीसदी गिरकर 76,517 के आसपास और निफ्टी करीब 727 अंक या 2.97 फीसदी गिरकर 23,723 के करीब कारोबार कर रहा था। मार्केट ब्रेथ बहुत ज़्यादा नेगेटिव था। NSE पर 2,600 से ज़्यादा स्टॉक्स गिरे थे जबकि सिर्फ़ 537 स्टॉक्स ही हरे निशान में थे।
यह बिकवाली ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की लड़ाई बढ़ने और दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की वजह से आई है। इस लड़ाई के चलते दुनिया के एक अहम तेल ट्रांज़िट रूट होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग में रुकावट आने तेल की सप्लाई कम होने का डर बढ़ गया है।
मार्केट एनालिस्ट का कहना है कि जिन सेक्टर में क्रूड ऑयल से जुड़ी इनपुट कॉस्ट ज़्यादा होती है वे आमतौर पर तेल की कीमतों में तेज़ उछाल पर सबसे पहले रिएक्ट करते हैं क्योंकि फ्यूल और पेट्रोकेमिकल की लागत बढ़ने से उनके मार्जिन मिला गिरावट आती है। ऐसे सेक्टरों में एयरलाइंस,टायर बनाने वाली कंपनियां और पेंट कंपनियां शामिल हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि तेल की कीमतों में उछाल मार्केट के लिए एक बड़ा झटका है।ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर से ऊपर चला गया है। इससे इकॉनमी और मार्केट को बड़ा झटका लगा है। अगर वेस्ट एशिया की लड़ाई लंबे समय तक चलती है और क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तरों पर रहती हैं तो भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर्स को भारी नुकसान होगा। मार्केट इस ऑयल शॉक के इकोनॉमिक नतीजों को ध्यान में रखते हुए ही रिएक्ट करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की संभावना है। इससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना धूमिल हो सकती है। इसके साथ ही आर्थिक विकास का आउटलुक भी कमजोर हो सकता है।
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