मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) के शेयर 31 अगस्त को कारोबार के दौरान रिकॉर्ड हाई यानी 10,043 रुपये पर पहुंच गए। बाद में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कंपनी का शेयर 2.12 पर्सेंट की बढ़त के साथ 10,003.80 रुपये पर बंद हुआ।

मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) के शेयर 31 अगस्त को कारोबार के दौरान रिकॉर्ड हाई यानी 10,043 रुपये पर पहुंच गए। बाद में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कंपनी का शेयर 2.12 पर्सेंट की बढ़त के साथ 10,003.80 रुपये पर बंद हुआ।
कंपनी के मंथली सेल्स के आंकड़े जल्द आने वाले हैं। निवेशकों ने ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) की उस एनालिसिस का भी स्वागत किया है, जिसमें मारुति सुजुकी इंडिया को शानदार परफॉर्मेंस वाली कंपनियों की सूची में रखा है।
कंपनी पर क्यों बुलिश है जेपी मॉर्गन
इस सेक्टर पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिस्काउंट और इन्वेंट्री बढ़ने के बावजूद कंपनी के मार्केट शेयर और मार्जिन में बढ़ोतरी का अनुमान है। ब्रोकरेज फर्म की 30 अगस्त की रिपोर्ट में कहा गया है, 'इस स्टॉक की परफॉर्मेंस मार्केट की परफॉर्मेंस से बेहतर रह सकती है।'
कंपनी की होलसेल वॉल्यूम भी बेहतर रहने की संभावना है और इस वजह से मार्केट शेयर में बढ़ोतरी होगी। अगस्त में कंपनी का मार्केट शेयर 43 पर्सेंट रहा। इसके अलावा, स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (SUVs) की वजह से मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में कंपनी के मार्जिन में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, 'जापान की हमारी ऑटो टीम यह बता रही है कि मारुति की पैरंट कंपनी सुजुकी मोटर की वॉल्यूम ग्रोथ बाकी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रहेगी। भारत में नए मॉडलों की लॉन्चिंग की वजह से ऐसा होगा।'
कॉम्पिटिशन में बने रहने का दबाव
जेपी मॉर्गन का यह भी कहना है कि फेस्टिव सीजन के बाद मारुति सुजुकी को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। इस अवधि में बाकी कंपनियां नई कारें लॉन्च कर सकती हैं और अगर मारुति सुजुकी की वास्तविक सेल्स की रफ्तार जारी नहीं रहती है, तो दिसंबर तिमाही में कंपनी की प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है।
कंपनी के शेयरों को फिलहाल 8,800 रुपये की कीमत पर न्यूट्रल (neutral) रेटिंग दी गई है। मारुति ने अपनी एन्युअल जनरल मीटिंग में कहा था कि उसकी योजना अगले 8 साल में प्रॉडक्शन क्षमता को डबल करने की है। मारुति के पास फिलहाल 45,000 करोड़ रुपये का कैश रिजर्व है और फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक उसका इरादा 40 लाख कारों का प्रॉडक्शन करना है।
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