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जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: एक तरफ एनएसई देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटा है तो दूसरी तरफ इसकी आंच में आज बीएसई और एमसीएक्स के शेयर झुलस गए। इन दोनों स्टॉक्स को वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक रिपोर्ट से झटका लगा है। जानिए इस रिपोर्ट में क्या है जो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jul 07, 2026 पर 2:39 PM
जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर
जेफरीज का कहना है कि NSE का प्रोडक्ट मिक्स BSE और MCX की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है।

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईपीओ की तैयारियों में जुटी एनएसई को अधिक डाईवर्सिफाइड कह दिया तो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए। तेज गिरावट के साथ ये निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स के टॉप लूजर बन गए जो खुद 2% कमजोर हुआ है। बता दें कि एनएसई ने बाजार नियामक सेबी के पास ₹30 हजार करोड़ के रिकॉर्डतोड़ आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस ड्राफ्ट ने लिस्टेड मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा। अभी देश में सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया का है जिसने ₹27858 करोड़ का आईपीओ सालव 2024 में पेश किया था।

NSE को लेकर क्या कहना है Jefferies का

जेफरीज का कहना है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है। जेफरीज ने जिक्र किया है कि एनएसई ने वैश्विक पियर्स की तुलना में अपना एक टेक प्रोडक्ट सुईट बनाया है और यह कमोडिटीज बिजनेस में विस्तार कर रही है। एनएसई के क्लियरिंग कॉरपोरेशन की कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ मार्केट में 91% हिस्सेदारी है। एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक सुईट है जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 13% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक ओवरऑल इंडियन एक्सचेंज का 70% रेवेवन्यू एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स हैं।

कंपनी के सेहत की बात करें तो जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने मिलकर एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए पर दबाव डाला। जेफरीज के मुताबिक सेबी सेटलमेंट फीस एक बार का होता है तो इसे निकालने पर देखें तो एनएसई का नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।

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