घरेलू और ग्लोबल मार्केट में तमाम इवेंट्स के बावजूद बाजार में तेजी कायम है। इलेक्शन के रिजल्ट भी बहुत मनमाफिक नहीं रहे फिर भी बाजार गिरा नहीं। नतीजों के बाद एक दो दिन का झटका मिला जरूर लेकिन फिर से रिकवरी हो गई। बाजार दमदार तेजी के साथ टिका हुआ है। ऐसे में सवाल है कि इस तेजी में क्या करें निवेशक? इन सवालों का जवाब देने को लिए सीएनबीसी-आवाज के साथ हैं prakashdiwan.in के प्रकाश दीवान, मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्योपाध्याय और SW Capital के डायरेक्टर पंकज जैन।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि सारे इकोनॉमिक इंडीकेटर इंडिया के पक्ष में हैं। देश में जबरदस्त ग्रोथ है। मानसून ठीक-ठाक चल रहा है। कंपनियों के नतीजे अच्छे आ रहे हैं। आगे भी इनके अच्छे रहने की उम्मीद है। ग्रामीण इकोनॉमी में थोड़ा बहुत दबाव था। सरकार की तरफ से इसको दूर करने की कोशिश हो रही है। मानसून ठीक होने के बाद उम्मीद ये है कि ग्रामीण इकोनॉमी की स्थिति भी ठीक हो जाएगी। कच्चे तेल की कीमतें भी तमाम आशंकाओं के बावजूद बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी हैं। ये भी भारत के पक्ष में जाता है।
भारत के पक्ष में इस समय जो फैक्टर सबसे जबरदस्त तरीके से काम कर रहा है वह है फाइनेंशियलाइजेशन ऑफ सेंविंग्स। पहले देश में होने वाली बचत बैंक में डिपाजिट के तौर पर पड़ी रहती थी। लेकिन अब ये बचत सीधे इक्विटी निवेश या म्यूचुअल फंडों में होने वाले निवेश के जरिए इक्विटी बाजार में आ रहा है। इसका भारतीय इक्विटी मार्केट की तेजी में सबसे अहम योगदान है। जनवरी से अब तक भारतीय बाजार में एफआईआई का निवेश जीरो रहा है। इस दौरान बाजार में आया सारा पैसा और इसकी सारी तेजी हमारे घरेलू निवेशकों के दम पर रही है।
सुदीप ने आगे कहा कि बाजार में आगे भी तेजी आएगी। फॉरेन निवेशक भी बाजार में पैसे डालेंगे। लेकिन बाजार में एक बात की अभी भी कमी है और बाजार के अच्छे हेल्थ के लिए वह बहुत जरूरी भी है। सुदीप का कहना है कि भारतीय बाजार की गहराई बढ़नी चाहिए। बाजार की गहराी तभी बढ़ेगी जब क्वालिटी पेपर्स मार्केट में आएंगे। बाजार में बहुत सारे क्वालिटी पेपर्स, क्वालिटी कंपनियों का आईपीओ होना जरूरी है। इसके आलाव या तो प्रमोटरों को अपने और शेयर बेचना चाहिए या सरकार सरकारी कंपनियों के शेयर बेचे जाने चाहिए। कहने का मतलब ये है कि बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़नी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर वही कुछ गिने-चुने शेयर निवेशक लेने की कोशिश करेंगे जिसके चलते इन शेयरों का वैल्युएशन अस्वाभाविक लेवल पर जा सकता है।
प्रकाश दीवान का कहना है कि पिछले 2 साल में मिड और स्मॉलकैप में जोरदार रैली आई। लेकिन मार्च 2024 के बाद से लार्ज कैप में तेजी देखने को मिल रही है। एफआईआई की भागीदारी शुरु होने के साथ ही लार्ज कैप में तेजी आनी शुरू हो गई है। वर्तमान की हालिया रैली लार्ज कैप की वजह से आई है। ये बात सही है कि बाजार में जब तक नई अच्छी कंपनियां नहीं आती हैं तब तक लोग पुरानी कंपनियों में ही पैसे लगाते रहेंगे ऐसे में बाजार में बबल बन सकता है। हालांकि अभी तो बाजार में कोई बबल नहीं है। लेकिन वैल्युएशन भी सस्ता नहीं है।
पंकज जैन का कहना है कि बाजार में आगे भी तेजी बनी रहेगी। बाजार में स्ट्रेंथ बनी रहेगी। बाजार में घरेलू निवेशकों की तरफ से काफी पैसा आ रहा है। एफआईआई भी अब भारत की तरफ रुख कर रहे हैं। बाजार में सेक्टोरल चर्निंग बनी रहेगी। हालांकि बजट के पहले किसी एकतरफा रैली की भी उम्मीद नहीं है। हालांकि बाजार में मजबूती कायम रहेगी।
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