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Budget 2026 Market Risk: इन तीन मोर्चे पर चूके तो, बजट के बाद शेयर मार्केट में मच जाएगा हाहाकार

Budget 2026 Market Risk: इस रविवार 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले वित्त वर्ष 2027 का बजट पेश करने वाली हैं। स्टॉक मार्केट को भी बजट से खास ऐलानों का इंतजार है जिससे बजट के बाद इसमें जोश आ सके लेकिन तीन ऐसे अहम रिस्क हैं जिनके चलते बजट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। डिटेल्स में पढ़ें

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jan 29, 2026 पर 11:05 AM
Budget 2026 Market Risk: इन तीन मोर्चे पर चूके तो, बजट के बाद शेयर मार्केट में मच जाएगा हाहाकार
Budget 2026 Market Risk: बजट से पहले मार्केट में उठा-पटक काफी बढ़ चुकी है और इसका अंदाजा वोलैटिलिटी को मापने वाले निफ्टी वोलैटिलिटी इंडेक्स से लगा सकते हैं जोकि इस महीने के शुरुआती दिनों से अब तक 15% से अधिक ऊपर चढ़ चुका है।

Budget 2026 Market Risk: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड लगातार नवें बार देश का बजट पेश करने वाली हैं। बजट से पहले मार्केट में उठा-पटक काफी बढ़ चुकी है और इसका अंदाजा वोलैटिलिटी को मापने वाले निफ्टी वोलैटिलिटी इंडेक्स से लगा सकते हैं जोकि इस महीने के शुरुआती दिनों से अब तक 15% से अधिक ऊपर चढ़ चुका है। इससे वैश्विक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और नीतिगत संकेतों को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के चलते निवेशकों की बढ़ती बेचैनी का पता लग रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर बजट से मजबूत राजकोषीय प्रोत्साहन नहीं मिला तो बिकवाली का खतरा बढ़ सकता है, तो जेफरीज और एचएसबीसी का मानना है कि सरकार आक्रामक तरीके से ग्रोथ को सपोर्ट करने की बजाय राजकोषीय कंसालिडेशन को प्राथमिकता देती है तो बजट के बाद मार्केट की तेजी पर अंकुश लग सकता है। यहां तीन ऐसे मोर्चे बताए जा रहे हैं, जिन पर झटका लगा तो मार्केट में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

शेयर मार्केट से जुड़ा टैक्सेशन

निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कैपिटल मार्केट टैक्सेशन को लेकर है। मार्केट को LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) पर 12.5% और STCG (शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन) पर 20% के टैक्स रेट में किसी बदलाव से डर है। साथ ही STT (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स) में भी किसी बदलाव को मार्केट सतर्क है जिसे अभी हाल ही में कैश और डेरिवेटिव, दोनों सेगमेंट में बढ़ाया गया था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों और रिटेल इंवेस्टर्स ने मार्केट को संभाला हुआ है और कुल ₹7.9 लाख करोड़ से अधिक शेयरों की नेट खरीदारी की है लेकिन अगर टैक्स के मोर्चे पर अगर कोई झटका लगा तो यह सपोर्ट हट सकता है।

फायर्स (FYRES) के को-फाउंडर और सीईओ तेजस खोड़े का कहना है कि अगर टैक्स की दरें बढ़ती हैं तो निश्चित ही बिकवाली का दबाव बढ़ेगा। मार्केट के जानकार का मानना है कि बजट में एलटीसीजी की एग्जेम्प्शन लिमिट को ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख किया जा सकता है या छोटे कैपिटल गेन्स को सेक्शन 87ए के रिबेट के तहत लाया जा सकता है। हालांकि गोल्डमैन सैक्स और जेफरीज का मानना है कि टैक्स में राहत की उम्मीद फिलहाल नहीं दिख रही है क्योंकि टैक्स कलेक्शन कमजोर हो रहा है और रुपया भी पिछले साल 2025 में 5% से अधिक कमजोर हुआ।

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