Budget 2026 Expectations: Insurance Sector को बजट से ये है उम्मीदें, धड़ाधड़ बिकेंगी पॉलिसीज!

Budget 2026 Expectations for Insurance Sector: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड लगातार नवें बार देश का बजट पेश करने वाली हैं। रविवार होने के बाद भी इस बार यह 1 फरवरी को ही पेश होगा। चेक करें कि इस बार जो बजट पेश होगा, उससे इंश्योरेंस इंडस्ट्री की क्या उम्मीदें हैं और किन ऐलानों से इंश्योरेंस इंडस्ट्री को राहत मिलेगी?

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 1:16 PM
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Budget 2026 Expectations for Insurance Sector: इस बार के बजट से इंश्योरेंस सेक्टर की काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

Budget 2026 Expectations for Insurance Sector: इस बार के बजट से इंश्योरेंस सेक्टर की काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। इंश्योरेंस इंडस्ट्री को टैक्स डिडक्शंस में बढ़ोतरी, नए टैक्स रिजीम में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर टैक्स बेनेफिट्स और GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) में ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) से जुड़ी राहतों की उम्मीद है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री का मानना है कि इन ऐलानों से इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर रुझान बढ़ेगा और अधिक से अधिक लोग कवर लेंगे। साथ ही एन्यूटी और पेंशन प्रोडक्ट्स में टैक्स के लेवल पर समानता आएगी और आईटीसी से जुड़ी राहतों पर प्रीमियम पर दबाव भी कम होगा। अभी पुरानी टैक्स रिजीम में सेक्शन 80डी के तहत इंडिविजुअल्स को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में ₹25 हजार तक सीनियर सिटीजंस को ₹50 हजार तक का डिडक्शन मिलता है।

Budget 2026 Expectations for Insurance Sector: इन राहतों की उम्मीद

इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ सुब्रत मंडल का कहना है कि इलाज अब जितना महंगा हुआ है, उसके हिसाब से मौजूदा डिडक्शंस पर्याप्त नहीं है तो अगर इसकी लिमिट दोगुनी की जाती है तो लोग कम कवरेज लेने की बजाय पर्याप्त कवरेज लेंगे और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी को सपोर्ट मिलेगा। वहीं टैक्स एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इस कटौती का फायदा नई टैक्स रिजीम में भी मिलना चाहिए। बी शंकर एडवोकेट्स के एमडी Shravanth Shanker का कहना है कि नए टैक्स रिजीम में भी इस डिडक्शंस का फायदा देने से यह सुनिश्चित होगा कि आसान टैक्स सिस्टम में आने वाले टैक्सपेयर्स भी इस डिडक्शंस का फायदा ले सकेंगे।


इनकम टैक्स एक्ट के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम और इसकी मेच्योरिटी पर मिले पैसे पर टैक्स बेनेफिट्स दिया जाता है। धारा 80सी के तहत प्रीमियम पर ₹1.5 लाख तक की कटौती और धारा 10(10डी) के तहत टैक्स-फ्री पेआउट मिलता है। इसे लेकर किंग स्टब एंड कासिवा, एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर विपिन उपाध्याय का कहना है कि लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर कटौती का फायदा पुरानी और नई, दोनों टैक्स रिजीम में मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि हाई प्रीमियम वाली पॉलिसी के लिए छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए तो एन्यूटी और पेंशन प्रोडक्ट्स पर टैक्स के लेवल पर समानता को सुनिश्चित करने से लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूती मिल सकती है। टैक्स एनालिस्ट्स का कहना है कि NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) के तहत पेंशन सेविंग्स के लिए जिस तरह एडीशनल डिडक्शंस मिलता है, वैसे ही टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर भी अलग से टैक्स डिडक्शन बेनेफिट दिया जा सकता है।

इंश्योरेंस इंडस्ट्री की मांग जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी दिक्कतों को सुलझाने की भी है। आईटीसी होने से बिजनेसेज को खरीदारी पर चुकाए गए टैक्स को एडजस्ट किया जा सकता है और बीमा कंपनियों का कहना है कि इसके न होने से लागत काफी बढ़ जाती है और पॉलिसी से मुनाफे पर असर पड़ता है। रिटेल लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंसज पर जीएसटी छूट से पॉलिसीहोल्डर्स को राहत मिली है लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन, कस्टमर सपोर्ट और टेक्नोलॉजी जैसे अहम सर्विसेज पर बीमा कंपनियां अब इनपुट टैक्स क्रेडिट को क्लेम नहीं कर पा रही हैं। गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस के मुख्य निवेश अधिकारी परिमल हेड़ा का कहना है कि इससे ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ती है और प्रीमियम बढ़ाना पड़ता है।

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