कोरोना वायरस का प्रकोप इतना बढ़ चुका है कि इसका असर अब देश के कई सेक्टर्स में देखने को मिल रहा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग (Electronics Manufacturing) और इस सेक्टर में कम से कम 50,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने के लिए 3 बड़ी योजनाओं की मंजूरी दी है।
इलेक्ट्रॉनकिस और इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर (Electronics and Information Technology Minister) रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 40,995 करोड़ रुपए की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि योजना का मकसद घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाना और मोबाइल फोन मैन्यूफैचरिंग और निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स Eelectronic Components) में बड़ा निवेश आकर्षित करना है। इनमें असेंबलिंग, टेस्टिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग ATMP यूनिट भी शामिल हैं। सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और सेमी कंडक्टर के मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहन में 3285 करोड़ रुपये की सहायता देगी। कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर को बनाने में जो पूंजूगत निवेश होगा, उस पर सरकार 25 फीसदी की फाइनेंशियल हेल्प करेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की तीसरी स्कीम के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का निर्माण होगा। जिसमें एक बड़ी कंपनी होगी और बाकी छोटी-छोटी कंपनियां होंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के निर्माण में 3762 करोड़ देनी की घोषणा की गई है।
रविशंकर प्रसाद के मुताबिक वस्तु की भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के साल के मुकाबले बिक्री में बढ़ोतरी पर 4-6 फीसदी का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह प्रोत्साहन योग्यता पर खरा उतरने वाली कंपनियों को 5 साल तक दिया जाएगा। इससे मोबाइल फोन में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़कर 35-40 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान है, जो अभी 2-25 फीसदी है। प्रोत्साहन योजना से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से (direct and indirect) कुल तकरीबन 8 लाख नए जॉब्स पैदा होने का अनुमान है।
सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।
