Cable Stocks: दिग्गज केबल कंपनियों- RR Kabel, KEI Industries और Polycab India के शेयरों में सोमवार, 7 सितंबर को भी गिरावट रही। केबल और वायर इंडस्ट्री में अब मुकाबला बढ़ने की चिंता है। पिछले एक हफ्ते में RR Kabel करीब 19%, KEI लगभग 15% और Polycab करीब 10% टूट चुका है।
इसकी वजह UltraTech Cement की इस कारोबार में एंट्री है। 31 अगस्त से शुरू हुआ हफ्ता केबल और वायर शेयरों के लिए फरवरी 2025 के बाद सबसे खराब रहा।
Citi को किस बात की चिंता है?
ब्रोकरेज फर्म Citi के मुताबिक UltraTech की एंट्री का असर वायर कारोबार पर ज्यादा पड़ सकता है। केबल के मुकाबले वायर में मुकाबला ज्यादा बढ़ने की आशंका है। Citi के मुताबिक RR Kabel और Havells की वायर कारोबार पर निर्भरता Polycab से ज्यादा है। इसलिए इन कंपनियों पर दबाव ज्यादा रह सकता है।
UltraTech ने पिछले हफ्ते गुजरात में अपनी वायर और केबल यूनिट समय से पहले शुरू कर दी। इसके बाद 2 सितंबर को इस सेक्टर के शेयरों में तेज बिकवाली हुई।
JM Financial ने रेटिंग घटाई
2 सितंबर को JM Financial ने Polycab और KEI Industries की रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ कर दी। वहीं, RR Kabel की रेटिंग ‘Add’ से घटाकर ‘Reduce’ कर दी। ब्रोकरेज का कहना है कि अभी सबसे बड़ा सवाल नई प्रतिस्पर्धा को लेकर है। बाजार शायद इसके असर को कम आंक रहा है।
JM Financial का अनुमान है कि UltraTech और Diamond Power FY29 तक मिलकर करीब ₹17,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल कर सकते हैं। इससे दोनों की कुल बाजार हिस्सेदारी 11-12% तक पहुंच सकती है।
Polycab पर सबसे ज्यादा दबाव?
JM Financial के मुताबिक इस सेक्टर के शेयर अपने 5 साल के औसत P/E से 4-5% प्रीमियम पर हैं। लंबी अवधि के औसत के मुकाबले यह प्रीमियम करीब 25% है।
ब्रोकरेज को ग्रोथ धीमी पड़ने और मार्जिन पर दबाव का खतरा सबसे ज्यादा Polycab में दिख रहा है। इसके बाद RR Kabel और KEI Industries का नंबर आता है।
अब निवेशकों की नजर किस पर?
Equirus Securities का मानना है कि UltraTech की एंट्री को लेकर शुरुआती घबराहट कुछ कम हुई है। अगर वायर और केबल इंडस्ट्री में वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत रहती है, तो नए खिलाड़ी को बाजार में जगह मिल सकती है। इसका मौजूदा कंपनियों पर बड़ा असर जरूरी नहीं है। लेकिन UltraTech आगे कितना पैसा लगाएगी, यह अहम रहेगा। खासकर अगर कंपनी केबल कारोबार में भी बड़ा निवेश करती है।
Diamond Power की विस्तार योजना भी मुकाबला बढ़ा सकती है। दोनों कंपनियां आने वाले वर्षों में मिलकर ₹15,000-17,000 करोड़ की नई क्षमता जोड़ सकती हैं। Equirus ने वैल्यूएशन को लेकर भी सावधान किया है। सेक्टर के शेयरों की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब हैं। ऐसे में कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा तो शेयरों में दबाव और बढ़ सकता है।
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