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बजट में कैपेक्स में बढ़त नहीं बल्कि गिरावट हुई है, सरकार को उठाना होगा बड़ा बोझ: बर्नस्टीन के वेणुगोपाल गैरे

फाइनेंशियल और खपत से जुड़े सेक्टर दो ऐसे सेक्टर हैं जिनमें इस समय दो अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। दूसरे सभी सेक्टरों में कोई खास ट्रेंड देखने को नहीं मिल रहा है। चुनाव से पहले के साल के काफी उतार-चढ़ाव वाला रहने की संभावना है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 06, 2023 पर 7:35 PM
बजट में कैपेक्स में बढ़त नहीं बल्कि गिरावट हुई है, सरकार को उठाना होगा बड़ा बोझ: बर्नस्टीन के वेणुगोपाल गैरे
वेणुगोपाल गैरे को कंपनियों के नतीजों के मौसम के बाद कोई बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। उनका मानना है कि कंपनियों के नतीजों में बाजार को नई दिशा देने की ताकत नहीं होगी

Bernstein's (बर्नस्टीन) के मैनेजिंग डायरेक्टर वेणुगोपाल गैरे (Venugopal Garre) के मुताबिक इस वर्ष के बजट में सबसे बड़ी बात ये है कि वास्तव में सरकार के पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में तेजी नहीं आ रही है बल्कि यह कम हो रही है। सीएनबीसी-टीवी 18 को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा कि बजट के एकाउंटिंग पहलू पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप बजट के इंफ्रा पर होने वाले खर्च पर ध्यान दें तो ये 10 लाख करोड़ रुपये रुपए के कुल कैपेक्स का 75-80 फीसदी है। बजट प्रावधानों पर नजर डालें तो इसमें सालाना आधार पर सिर्फ 20 फीसदी की बढ़त हुई है। जबकि पिछले साल इसमें सालाना आधार पर 31 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी।

निजी क्षेत्र की तरफ से बहुत अच्छा निवेश होने की उम्मीद नहीं

उन्होंने आगे कहा कि इस साल निजी क्षेत्र की तरफ से बहुत अच्छा निवेश होने की उम्मीद नहीं है। बैंकिंग सेक्टर आम तौर पर निजी क्षेत्र को उधार देने को लेकर थोड़ा सावधान रहेगा। अगर ये उधार इन्फ्रा से जुड़ा होगा तो बैंक और सावधानी बरतेंगे। ऐसे में सरकार को ही भारी उठाने के लिए तैयार रहना होगा।

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