CCI की जांच से बड़ा खुलासा, जेएसडब्ल्यू स्टील, सेल और टाटा स्टील ने स्टील की कीमतें बढ़ाने के लिए मिलीभगत की थीं

CCI ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सरकारी कंपनी सेल के अलावा 25 अन्य कंपनियों को एंटीट्रस्ट कानून के उल्लंघन का दोषी पाया है। 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग समय में 56 सीनियर एग्जिक्यूटिव्स को भी मिलीभगत के लिए जिम्मेदार माना गया है

अपडेटेड Jan 06, 2026 पर 8:14 PM
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इस रिपोर्ट के बाद 6 जनवरी को जेएसडब्ल्यू स्टील, सेल और टाटा स्टील के शेयरों में गिरावट आई।

कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने स्टील बनाने वाली देश की तीन बड़ी कंपनियों के अलावा 25 अन्य कंपनियों को एंटीट्रस्ट कानून के उल्लंघन का दोषी पाया है। इन कंपनियों ने स्टील की कीमतें बढ़ाने के लिए मिलीभगत की। रायटर्स ने 6 जनवरी को यह रिपोर्ट दी है। इन कंपनियों में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सरकारी कंपनी सेल शामिल हैं।

56 सीनियर एग्जिक्यूटिव्स भी मिलीभगत में शामिल

CCI ने 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग समय में 56 सीनियर एग्जिक्यूटिव्स को भी मिलीभगत के लिए जिम्मेदार माना है। इनमें जेएसडब्ल्यू के मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के चीफ एग्जिक्यूटिव अफसर टीवी नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व चेयरपर्संस शामिल हैं। यह जानकारी सीसीआई के 6 अक्तूबर के ऑर्डर पर आधारित है। इस ऑर्डर को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।


साल 2021 में सीसीआई ने की थी जांच की शुरुआत

जेएसडब्ल्यू ने इस बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया। टाटा स्टील और सेल के एग्जिक्यूटिव्स ने रायटर्स के सवालों के जवाब नहीं दिए। सीसीआई ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया के अनुरोध को ठुकरा दिया। सीसीआई की यह जांच इंडिया के स्टील सेक्टर से जुड़ी सबसे हाई-प्रोफाइल जांच थी। जांच की शुरुआत 2021 में तब हुई थी, जब बिल्डर्स के एक एसोसिएशन ने इस बारे में आरोप लगाया था।

2022 में सीसीआई ने कुछ स्टील कंपनियों पर छापे मारे थे

तमिलनाडु के एक कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि स्टील कंपनियां मिलकर सप्लाई कम कर रही हैं और प्राइसेज बढ़ा रही हैं। रायटर्स ने 2022 में बताया था कि सीसीआई ने अपनी जांच के तहत कुछ स्टील कंपनियों पर छापे मारे हैं। बाद में इस जांच के दायरे में 31 कंपनियों, इंगस्ट्री बॉडीज और कई दर्जन एग्जिक्यूटिव्स को शामिल किया गया।

 सीसीआई को जांच की जानकारी सार्वजनिक करने की इजाजत नहीं 

सीसीआई के नियमों के तहत, कार्टल से जुड़े जांच के मामलों की जानकारी तब तक सार्वजनिक नहीं की जाती है, जब तक मामले की प्रोसिडिंग्स पूरी नहीं हो जाती। सीसीआई के अक्तूबर के ऑर्डर में कहा गया था कि जांच में यह पाया गया कि पार्टीज ने एंटीट्रस्ट कानून का उल्लंघन किया था। उसने यह भी कहा था कि इस मामले में कुछ इंडिविजुअल को भी शामिल पाया गया।

कंपनियों पर पेनाल्टी लगा सकता है सीसीआई

जांच की रिपोर्ट पर सीसीआई के सीनियर अधिकारी विचार करेंगे। उसके बाद फाइनल ऑर्डर इश्यू होने से पहले कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स को अपनी आपत्ति पेश करने का मौका दिया जाएगा। रायटर्स ने यह जानकारी दी है। इंडिया दुनिया में क्रूड स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। सीसीआई के पास कंपनी के प्रॉफिट का तीन गुना या टर्नओवर का 10 फीसदी पेनाल्टी लगाने का अधिकार है। इनमें से जो ज्यादा होता है वह लागू होता है। यह नियमों के उल्लंघन से जुड़े प्रत्येक साल के लिए लगाया जाता है।

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इस खबर से गिरे स्टील कंपनियों के शेयर

सीसीआई कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स पर भी जुर्माना लगा सकता है। इस रिपोर्ट के बाद 6 जनवरी को जेएसडब्ल्यू स्टील, सेल और टाटा स्टील के शेयरों में गिरावट आई। इससे निफ्टी मेटल इंडेक्स गिरकर बंद हुआ। सीसीआई के अक्तूबर ऑर्डर में यह नहीं बताया गया है कि इस मामले में किस तरह के सबूतों की जांच की गई। रायटर्स ने कहा है कि जुलाई 2025 के एक इनटर्नल सीसीआई डॉक्युमेंट से पता चला कि अधिकारियों ने क्षेत्रीय इंडस्ट्री ग्रुप के बीच व्हाट्सअप मैसेजेज का पता लगाया था। इससे प्राइसिंग फिक्सिंग और सप्लाई में रुकावट का संकेत मिला।

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