यूएस फेड के रुख में बदलाव से लार्जकैप में आएगी जोरदार तेजी : सौरभ मुखर्जी

सौरभ ने कहा कि अब लार्जकैप में ठोस तेजी आएगी। पिछले दो सालों में हमें भारत में स्मॉलकैप में काफी तेजी देखने को मिली थी। ये पिछले 20 सालों की भारत की सबसे मजबूत स्मॉलकैप रैली रही है। स्मॉलकैप की इस रैली में कई चीजों का योगदान रहा। उसमें अमेरिका में दरों में की गई तेज बढ़त भी शामिल है। अमेरिकी ब्याज दरों में तेज बढ़त से विदेशी निवेशकों ने अपने कदम पीछे खींच लिए और जब विदेशियों ने भारतीय बाजार से अपने कदम पीछे लिए तो वे घरेलू निवेशक शेयर बाजार पर हावी हो गए, जो छोटे-मझोले शेयरों में ज्यादा रुचि रखते हैं

अपडेटेड Dec 14, 2023 पर 2:20 PM
विदेशी निवेश के लिहाज से भारत के लिए एक अच्छा साल 40 अरब डॉलर निवेश वाला माना जाता है। जबकि 20 से 30 अरब डॉलर निवेश वाले साल को एक औसत साल माना जाता है

मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और सीआईओ सौरभ मुखर्जी ने कहा कि यूएस फेड की तरफ से 2024 में बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती पर फेडरल रिजर्व की टिप्पणी का भारतीय बाजारों पर अच्छा असर देखने को मिलेगा। इससे आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में एफआईआई के निवेश में बढ़त हो सकती है।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि जो डेटा हम देख रहे हैं उससे पता चलता है कि पश्चिमी दुनिया में महंगाई 2-3 फीसदी तक कम हो गई है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कच्चे तेल या खनिज की कीमतों में कोई उछाल नहीं है। मध्य पूर्व युद्ध के तीन महीने बाद कच्चा तेल 90 डॉलर से गिरकर 70 डॉलर पर आ गया है और चाइनीज अर्थव्यवस्था तिमाही दर तिमाही गिरावट का सामना कर रही है। इन्ही स्थितियों को देखते हुए फेडरल रिजर्व ने अगले साल दरों में कटौती की बात कही है।

सौरभ ने आगे कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि विदेशी निवेशक भारत में पैसे लगाने के लिए दरें कम होने का इंतजार करेंगे। इस साल मार्च/अप्रैल से, जब विदेशी निवेशकों को यह आभास हुआ कि रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ने वाला नहीं है, तब से हलचल शुरू हो गई। रुपया जनवरी 2022 में 72 रुपये प्रति डॉलर से गिरकर फरवरी 2023 में 82 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। फिर एक बार जब अमेरिकी बैंकों का पतन शुरू हुआ, तो हम डॉलर के मुकाबले 82 रुपये से मामूली नरम होकर 83 रुपये पर आ गए।


ऐसे में लगता है कि विदेशी निवेशकों को इस बात का पूरा आभास होगा कि रुपये में और नरमी की संभावना बहुत कम है। अब क्योंकि फेड ने अपना संकेत दे दिया है, भारत में मजबूत आर्थिक विकास हो रहा है और राजनीतिक स्पष्टता भी है। ऐसे में अगले कैलेंडर ईयर में देश में 20 से 30 अरब डॉलर का विदेशी निवेश (इक्विटी) आने की उम्मीद है। विदेशी निवेश के लिहाज से भारत के लिए एक अच्छा साल 40 अरब डॉलर निवेश वाला माना जाता है। जबकि 20 से 30 अरब डॉलर निवेश वाले साल को एक औसत साल माना जाता है। ऐसे में एफआईआई निवेश के नजरिए से 2024 के एक औसत साल रहने की उम्मीद है।

यूएस फेड के रुख में बदलाव से बढ़ेगा विदेशी निवेश, स्मॉलकैप्स में अभी भी बाकी है दम : शंकर शर्मा

बाजार पर बात करते हुए सौरभ ने कहा कि अब लार्जकैप में ठोस तेजी आएगी। पिछले दो सालों में हमें भारत में स्मॉलकैप में काफी तेजी देखने को मिली थी। ये पिछले 20 सालों की भारत की सबसे मजबूत स्मॉलकैप रैली रही है। स्मॉलकैप की इस रैली में कई चीजों का योगदान रहा। उसमें अमेरिका में दरों में की गई तेज बढ़त भी शामिल है। अमेरिकी ब्याज दरों में तेज बढ़त से विदेशी निवेशकों ने अपने कदम पीछे लिए और जब विदेशियों ने भारतीय बाजार से अपने कदम पीछे खींच लिए तो वे घरेलू निवेशक शेयर बाजार पर हावी हो गए जो छोटे-मझोले शेयरों में ज्यादा रुचि रखते हैं। इस ट्रेंड ने स्मॉलकैप के शिखर पर पहुंचने में एक बड़ी भूमिका निभाई है। इसका मतलब ये नहीं है विदेशी पैसा आने से यह ट्रेंड पूरी तरह से उलट जाएगा लेकिन यह भी सही है कि प्रदर्शन के मामले में स्मॉलकैप का दबदबा अगले कुछ सालों तक के लिए कम हो जाएगा।

 

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