दिग्गज फंड मैनेजर और जेफरीज की इक्विटी स्ट्रैटजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड (Chris Wood), भारतीय शेयर बाजार में अभी और गिरावट देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार इस समय घरेलू निवेशकों की ओर से लगातार फंड डाले जाने से ऊपर बना हुआ है। हालांकि वह भारत में निवेश से पहले शेयर बाजार में थोड़ी और गिरावट देखना पसंद करेंगे। वुड ने कहा कि भारतीय शेय बाजार ने लचीलापन दिखाया है। हालांकि इसके बावजूद वह इसे लेकर सतर्क हैं। वुड ने CNBC Asia को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "अगर मैं आज निवेश कर रहा होता और कोई मुझे भारत में 100 डॉलर लगाने को कहता, तो मैं केवल एक तिहाई राशि ही निवेश करता। क्योंकि इस बात की मजबूत संभावना है कि हमें थोड़ा और करेक्शन देखने को मिल सकता है।" उन्होंने कहा, "वो काफी दो तिहाई राशि को अपने पास कैश में रखना पसंद करते।"
वुड इस समय जरूर भारतीय बाजार को लेकर सतर्क हैं। लेकिन उनका मानना है कि अगले 10 साल की लंबी अवधि के लिहाज से भारत के पास दुनिया के बाकी स्टॉक मार्केट की तुलना में कहीं अधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, "भारत का स्टॉक मार्केट अब विदेशी निवेशकों के नहीं, बल्कि घरेलू निवेशकों के पैसे पर चल रहा है। यह तथ्य अपने आप में बेहद पॉजिटिव खबर है।"
जापानी येन में मजबूती और अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद हाल ही में ग्लोबल लेवल पर बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। भारतीय शेयर बाजार में भी उच्च स्तर से गिरावट आई, लेकिन बाकी देशों के मुकाबले यह गिरावट काफी कम थी। यह बाजार के लचीलेपन को दिखाता है।
वुड का मानना है कि अगर भारतीय बाजारों में कोई बड़ा करेक्शन होता है, तो विदेशी निवेशक इस मौके का फायदा उठाते हुए बड़ी खरीदारी कर सकते हैं। वैसे भी विदेशी निवेशकों का भारत में निवेश इस समय कम है। बजट के बाद से विदेशी इंस्टीट्यूशन इनवेस्टर्स (FIIs) लगातार कैश मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार के कारोबारी सत्र में ही कैश मार्केट में 1 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की।
उन्होंने कहा, "भारत के बारे में दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी कम हो रही है और उनकी जगह घरेलू निवेशक ले रहे हैं। इसका यह भी मतलब है कि भारत में किसी भी बड़े करेक्शन के बाद विदेशी निवेशक यहां की ओर रुख कर सकते हैं।"