Coforge Share Price: मल्टीनेशनल आईटी कंपनी कोफोर्ज के शेयरों में आज बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि यह 8% से अधिक टूट गया। इस पर यह दबाव कंपनी के चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक ओम प्रकाश भट्ट के कार्यकाल खत्म होने से पहले इस्तीफे पर आया है। इससे निवेशक घबरा उठे और धड़ाधड़ शेयर बेचने लगे जिसके चलते अप्रैल 2025 के बाद से यानी कि इंट्रा-डे में आज यह करीब 17 महीने में सबसे तेज स्पीड से फिसल गया। निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 5.34% की गिरावट के साथ ₹1845.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 8.67% फिसलकर ₹1,780.10 तक आ गया था।
Coforge के चेयरमैन ने क्यों दिया समय से पहले इस्तीफा
कोफोर्ज के चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट का कार्यकाल अप्रैल 2027 तक था लेकिन उन्होंने करीब 7 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। उनका इस्तीफा प्रभावी हो चुका है यानी कि अब वह कंपनी से नहीं जुड़े हैं। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया, जब एक इंटर्नल ऑडिट को लेकर बोर्ड उनके जवाब का रिव्यू कर रहा है। बता दें कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में अंदरूनी तौर पर एक ऑडिट हुई थी, जिसमें चेयरमैन की अगुवाई में BER (बोर्ड्स सेल्फ रिव्यू) हुई।
रिव्यू में सामने आया कि चेयरमैन से जुड़ी पूरी जानकारी बीईआर के सामने रखते समय नहीं पेश की गई। बोर्ड ने इसे लेकर ओम प्रकाश भट्ट से जानकारी मांगी और उनके जवाब का रिव्यू करने लगी लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही ओम प्रकाश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया। कंपनी ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि बीईआर में कौन-सी डिटेल्स सामने नहीं आई थी। वहीं ओम प्रकाश भट्ट का कहना है कि बोर्ड के एवैल्यूएशन प्रोसेस के दौरान उनका बोर्ड में बने रहना इसके प्रभावी तरीके से काम करने के लिहाज से बेहतर नहीं रहेगा और उन्होंने इसे ही अपने इस्तीफा की मुख्य वजह बताई।
बता दें कि एसबीआई के पूर्व चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट साल 2024 में कोफोर्ज के चेयरमैन बने थे। अब उनके इस्तीफे के बाद बोर्ड ने नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को 31 जनवरी 2027 तक के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। ओम प्रकाश भट्ट ने कंपनी की सभी कमेटियों से भी तुरंत इस्तीफा दे दिया है।
एक और अहम बात ये है कि यह मूल्यांकन वित्तीय सेहत से जु़ड़ा नहीं है। एक अलग एक्सचेंज फाइलिंग में कोफोर्ज ने कहा कि पिछले साल के लिए मार्च और अप्रैल 2026 में होने वाला बोर्ड मूल्यांकन कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट से जुड़ा नहीं है और ऐसी बातों का कंपनी की गाइडेंस पर कोई असर नहीं पड़ता है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह बोर्ड के मूल्यांकन की प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए यह स्पष्टीकरण दे रही है। बोर्ड के मूल्यांकन में आम तौर पर ये चीजें शामिल होती हैं, जैसे कि बोर्ड कैसे काम करता है, चर्चाओं और फैसलों की गुणवत्ता, मैनेजमेंट की निगरानी, कन्फ्लिक्ट्स, कमेटी का काम और चेयरमैन समेत हर डायरेक्टर का परफॉर्मेंस।
एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?
कोफोर्ज के शेयरों ने निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है और वैश्विक उथल-पुथल के बीच महज 5 महीने में ही निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया। 17 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹1,008.50 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में यह 100.49% उछलकर 31 अगस्त 2026 को ₹2,021.95 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।