सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) पर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार 10 सितंबर को नए आरोप लगाए। कांग्रेस ने माधबी बुच के दावों को गलत बताते हुए कहा कि SEBI की फुल-टाइम मेंबर रहते हुए भी माधबी बुच और उनके पति अपने स्वामित्व वाली एडवाइजरी कंपनी 'अगोरा प्राइवेट लिमिटेड (Agora Private Limited)' से कमाई करते रहे। हालांकि माधबी बुच ने दावा किया था कि उनके पदभार ग्रहण के बाद से अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड निष्क्रिय पड़ी है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हिंडनबर्ग रिपोर्ट में एक कंपनी अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया था, जो कि 7 मई 2013 में रजिस्टर हुई थी। यह कंपनी माधबी पुरी बुच और उनके पति की है, लेकिन माधबी ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद इस बात का खंडन किया था। उस खंडन में उन्होंने लिखा कि जब वो SEBI में चली गई, तब से यह कंपनी Dormant (निष्क्रिय) है। लेकिन इस कंपनी में अभी भी 99% हिस्सेदारी माधबी की है।"
खेड़ा ने आगे कहा, "जब आप कहीं नौकरी करते हैं तो वहां कुछ नियम होते हैं, लेकिन माधबी ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया। माधबी ने Agora के जरिए 2 करोड़ 95 लाख रुपए कमाए। इसमें सबसे ज्यादा 88% पैसा महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) से आया। वहीं, माधबी पुरी के पति धवल बुच को साल 2019-21 के बीच में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी से 4 करोड़ 78 लाख रुपए मिले। वो भी तब.. जब माधबी पुरी बुच SEBI में पूर्ण-कालिक सदस्य थीं। ऐसे में यह नियमों का उल्लंघन है। इस दौरान SEBI ने महिंद्रा एंड महिंद्रा के पक्ष में कई आदेश भी जारी किए थे।"
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "हमारे सवाल थे कि : Agora से किन-किन कंपनियों ने सेवाएं लीं? जिन कंपनियों ने Agora की सेवाएं लीं, क्या वो SEBI के स्कैनर में हैं? इसका जवाब हमें मिला कि माधबी ने SEBI के अपने कार्यकाल में रहते हुए Agora के माध्यम से 2 करोड़ 95 लाख रुपए कमाए। जिन कंपनियों से ये पैसा कमाया गया, उनमें से कुछ नाम हैं: महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड, डॉक्टर रेड्डीज, पिडिलाइट, आईसीआईसीआई, सेम्बकॉर्प और विसु लीजिंग एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड।"
कांग्रेस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए उनसे भी कई सवाल पूछे। पवन खेड़ा ने कहा, "प्रधानमंत्री से हमारे कुछ सवाल है। क्या आपको पता था कि Agora में माधबी जी की 99% शेयर होल्डिंग है? जब आपने माधबी जी को SEBI चेयरपर्सन बनाया, तो क्या आपको किसी एजेंसी ने रिपोर्ट नहीं दी थी? क्या आपको जांच एजेंसियों ने नहीं बताया था कि Agora के आर्थिक-व्यावसायिक रिश्ते उन कंपनियों से हैं, जिनकी जांच SEBI कर रही है? क्या आपके सामने किसी ने भी माधबी जी के खिलाफ सबूत नहीं रखे थे कि इन्हें दूसरे कंपनियों से इतने पैसे क्यों मिल रहे हैं? अगर ये सबूत सामने रखे गए थे, तो फिर कौन सी मिलीभगत जारी है। आखिर किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है और क्यों किसी को बचाया जा रहा है?"