Crude Oil Sensitive Stocks: US-Iran War से उबरा तेल, इन स्टॉक्स से सीधा कनेक्शन

Oil Sensitive Stocks: कच्चे तेल की नरमी पर सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आज 1-1% उछल पड़े। वहीं दूसरी तरफ इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो कच्चे तेल की भाव नीचे आने का मिला-जुला असर दिखता है, कुछ सेक्टर्स में रौनक छा जाती है तो कुछ में मातम। जानिए किन सेक्टर्स पर इसका कैसा असर दिखता है और स्टॉक्स की लिस्ट तैयार कर फिर बनाएं मुनाफे की स्ट्रैटेजी

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 1:13 PM
Crude Oil Sensitive Stocks: वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उसी लेवल पर वापस आ गया, जिस पर यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले था। इसका स्टॉक मार्केट में इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग असर दिखा।

Crude Oil Sensitive Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते में प्रगति पर वैश्विक मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ी तो इसके भाव फिसल गए। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उसी लेवल पर वापस आ गया, जिस पर यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले था। इसने वैश्विक मार्केट में रौनक बिखेर दी। घरेलू मार्केट में इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) 1-1% उछल पड़े। हालांकि इंडिविजुअल स्टॉक्स में इसका असर अलग-अलग पड़ा। जैसे कि कुछ सेक्टर के शेयर तो कच्चे तेल की फिसलन पर झूम पड़े तो दूसरी तरफ कुछ सेक्टर्स में मातम छा गया। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की बात करें तो 27 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार $73 प्रति बैरल से नीचे फिसला है। यह 30 अप्रैल को $126 प्रति बैरल के हाई लेवल पर पहुंचा था और उस लेवल से 42% नीचे है।

कच्चे तेल की फिसलन से इन सेक्टर्स पर असर

एयरलाइन्स, OMCs (ऑयल मार्केटिंग कंपनीज), टायर बनाने वाली कंपनियों और पेंट कंपनियों के शेयरों पर कच्चे तेल की फिसलन का पॉजिटिव असर दिख सकता है। इसकी वजह ये है कि क्योंकि कच्चे तेल की नरमी से इनके तेल और इनपुट कॉस्ट कम होंगे। वहीं दूसरी तरफ तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ने की आशंका है क्योंकि तेल की सस्ते में बिक्री पर इनकी कमाई कम होगी।


इस कारण पड़ता है असर

इंडिगो (Indigo) की पैरेंट कंपनी (Interglobe Aviation) जैसी एविएशन कंपनियों के शेयरों पर कच्चे तेल की फिसलन का इस कारण पॉजिटिव असर दिखता है क्योंकि एयरलाइंस का सबसे अधिक खर्च ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर होता है और कच्चे तेल की नरमी से इसके प्रॉफिटिबिलिटी को सपोर्ट मिलता है।

तेल बेचने वाली सरकारी कंपनियों जैसे कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल (Indian Oil) के शेयरों पर इसलिए पॉजिटिव असर दिखता है क्योंकि कच्चे तेल की नरमी से इनके मार्केटिंग मार्जिन में सुधार होता है और तेल की खुदरा कीमतों को लेकर दबाव कम होता है।

अपोलो टायर्स (Apollo Tyres), सीट (CEAT) और जेके टायर (JK Tyre) जैसे टायर स्टॉक्स को इस कारण कच्चे तेल की नरमी से सपोर्ट मिलता है क्योंकि न्यूट्रल और सिंथेटिक रबर के भाव क्रूड डेरिवेटिव्स से जुड़े होते हैं और जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो टायर बनाने वाली कंपनियों को फायदा मिलता है।

कच्चे तेल की नरमी से एशियन पेंट्स (Asian Paints) और बर्जर पेंट्स (Berger Paints) जैसे पेंट स्टॉक्स की चमक बढ़ती है। इसकी वजह ये है कि पेंट बनाने वाली कंपनियों की लागत का एक बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल से जुड़ा है तो इसके भाव नीचे आने पर मार्जिन को सपोर्ट मिलता है।

अब बात करतें है तेल निकालने वाली कंपनियों जैसे कि ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (Oil India) को कच्चे तेल की नरमी पर दबाव झेलना पड़ता है। इसकी वजह ये है कि भाव नीचे आने पर तेल निकालने वाली कंपनियों को कच्चा तेल सस्ता बेचने पड़ता है और कमाई कम होती है।

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