Daily Voice : जेपी मॉर्गन बॉन्ड इंडेक्स में भारतीय सरकारी बॉन्ड को शामिल करना एक ऐसा कदम था जिसकी लंबे समय से उम्मीद लगाई जा रही थी। बेशक ये एक ऐसा कदम है जिससे मध्यम से लंबी अवधि में बहुत फायदा होगा। ये बातें एंबिट एसेट मैनेजमेंट के सीईओ सुशांत भंसाली ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं। उनका मानना है कि इस कदम से वित्त वर्ष 2025 में भुगतान संतुलन (बीओपी) की समस्या हल हो जाएगी और भारतीय रुपये में मजबूती आएगी। यह भारत के लिए सही दिशा में उठा एक कदम है।
आईटी सर्विसेज कंपनियां आने वाली तिमाहियों में करेंगी अच्छा प्रदर्शन
एसेट मैनेजमेंट का 19 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले सुशांत भंसाली ने आगे कहा कि आईटी सर्विसेज कंपनियां आने वाली तिमाहियों में अच्छा प्रदर्शन करेंगी। बाजार अक्सर आगे की देख कर अपनी चाल तय करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़त का चक्र लगभग समाप्ति के कगार पर है। ऐसे में आगे आईटी कंपनियां अब तेजी पकड़ती दिखेंगी। कैलेंडर वर्ष 2023 की शुरुआत से ही एंबिट आईटी सेक्टर पर पॉजिटिव रहा है। उसने पहले ही सभी पोर्टफोलियो में आईटी का वेटेज बढ़ा दिया है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली है। हालांकि ये रैली मुख्य रूप से छोटे और मझोले शेयरों के आसपास केंद्रित रही है। वहीं, इस दौरान लार्जकैप ने आम तौर पर कमजोर प्रदर्शन किया है। निफ्टी का वैल्यूएशन अभी भी काफी हद तक लॉन्ग टर्म एवरेज के आसपास ही बना हुआ है।
अर्निंग ग्रोथ आउटलुक में मजबूती है और इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत है। इस सबका ममतलब यह है कि निफ्टी और अच्छी क्वालिटी वाले अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं जिसे हम महंगा कहेंगे। हालांकि बाजार में अब बहुत तेजी से बढ़त की उम्मीद नहीं है। फिर भी इसका आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है।
जब तक महंगाई 7-7.5 फीसदी के दायरे में रहेगी दर बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और इसके असर पर बात करते हुए सुशांत भंसाली ने कहा कि आमतौर पर, पिछले कुछ महीनों से महंगाई एक बड़ा मुद्दा रहा है। देश की रिटेल महंगाई ने आरबीआई के टॉलरेंस लिमिट को तोड़ दिया है। ये ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। हालांकि अब तक इसमें सबसे बड़ा योगदान खाने-पीने की चीजों का था। लेकिन अब कच्चे तेल ने भी दबाव बढ़ा दिया है। महंगाई में यह बढ़त न केवल मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बल्कि वित्त वर्ष 2024 की दूसरी छमाही में BoP (भुगतान संतुलन) और CAD (चालू खाता घाटा) के लिए भी चिंता का विषय होगी। हालाकि, जब तक महंगाई 7-7.5 फीसदी के दायरे में रहेगी आरबीआई की तरफ से दर बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। ऐसी स्थिति में आरबीआई केवल नकदी की उपलब्धता कम करने के उपाय करेगा।
अब तक की जोरदार तेजी के बाद मिड और स्मॉल कैप में क्या हो रणनीति इस पर बात करते हुए सुशांत भंसाली ने कहा कि अब मिड और स्मॉल कैप को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। लेकिन इन सेक्टरों में अभी कई शेयरे ऐसे हैं जिनमें ग्रोथ और प्रॉफिट की अच्छी संभावना है। इन पर नजर रखने की सलाह होगी।
सुशांत भंसाली को लगता है कि सितंबर तिमाही का नतीजों का सीजन वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के समान ही रहेगा। सितंबर तिमाही में भी कमजोर उपभोक्ता मांग और मार्जिन में मजबूत विस्तार देखने को मिलेंगे। बीएसएफआई का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। जबकि आईटी सेवाओं में नरमी देखने को मिल सकती है।
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