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Daily Voice : खराब ग्लोबल माहौल में भी इंडस्ट्रियल और इंफ्रा शेयरों में दिख रही उम्मीद की किरण

Daily Voice : इक्विटी और वेल्थ मैनेजमेंट का 20 सालों का अनुभव रखने वाले मिलिंद ने कहा कि जूलियस बेयर के ग्लोबल डेस्क का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई में नरमी आने और वेतन बढ़ोतरी कम होने के साथ श्रम बाजार की नरमी फेड को आगामी नीति बैठकों में दरों में और बढ़ोतरी करने से रोक सकती है। हालांकि, सख्ती का दौर थमने के बावजूद, केंद्रीय बैंक लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को उच्च स्तरों पर बनाए रख सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 25, 2023 पर 1:43 PM
Daily Voice : खराब ग्लोबल माहौल में भी इंडस्ट्रियल और इंफ्रा शेयरों में दिख रही उम्मीद की किरण
Daily Voice : सितंबर तिमाही के अब तक आए नतीजों पर बात करते हुए मिलिंद ने कहा कि अब तक आए वित्त वर्ष 2024 के दूसरी तिमाही के नतीजे काफी हद तक अनुमान के मुताबिक ही रहे हैं। इनमें कोई बड़ा आश्चर्य या झटका नहीं लगा है

Daily Voice : मध्य पूर्व में गहराता संकट और इसके चलते बना जियोपोलिटिकल तनाव दुनिया भर के बाजारों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इस संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे निवेशकों की भावनाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। ये बातें जूलियस बेयर इंडिया (Julius Baer India) के कार्यकारी निदेशक मिलिंद मुछाला (Milind Muchhala) ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल इस समय बाजार का फोकस दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से उठाए गए कदमों पर है क्योंकि महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जूलियस बेयर का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था 'सॉफ्ट लैंडिंग' हासिल कर लेगी। लेकिन अमेरिका में लॉन्ग टर्म ब्याज दरें लंबे समय तक 5.5 फीसदी से ऊपर बनी रह सकती हैं। भारतीय इकोनॉमी और बाजार पर बात करते हुए मिलिंद मुछाला ने कहा कि वित्त वर्ष 2024 की सितंबर तिमाही में इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का प्रदर्शन काफी अच्छा रह सकता है।

इक्विटी और वेल्थ मैनेजमेंट का 20 सालों का अनुभव रखने वाले मिलिंद ने कहा कि जूलियस बेयर के ग्लोबल डेस्क का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई में नरमी आने और वेतन बढ़ोतरी कम होने के साथ श्रम बाजार की नरमी फेड को आगामी नीति बैठकों में दरों में और बढ़ोतरी करने से रोक सकती है। हालांकि, सख्ती का दौर थमने के बावजूद, केंद्रीय बैंक लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को उच्च स्तरों पर बनाए रख सकते हैं।

सितंबर तिमाही के अब तक आए नतीजों पर बात करते हुए मिलिंद ने कहा कि अब तक आए वित्त वर्ष 2024 के दूसरी तिमाही के नतीजे काफी हद तक अनुमान के मुताबिक ही रहे हैं। इनमें कोई बड़ा आश्चर्य या झटका नहीं लगा है। हालांकि अभी भी कई सेक्टरों के कई हैवीवेट नतीजे आने बाकी हैं। अब तक फाइनेंशियल, आईटी और उपभोग से जुड़े कई दिग्गजों के नतीजे आए हैं। हमें अगले कुछ हफ़्तों में नतीजों की स्पष्ट तस्वीर मिल जाएगी।

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