Daily Voice: फ्रैंकलिन टेंपलटन के हरि श्यामसुंदर ने कहा-कुछ फाइनेंशियल्स, आईटी, कंस्ट्रक्शन स्टॉक्स में दिख रहे निवेश के मौके

फ्रैंकलिन टेंपलटन एसेट मैनेजमेंट के हरि श्यामसुंदर ने कहा कि इंडियन मार्केट्स ने 2024 में अच्छा प्रदर्शन किया है। Nifty 50 ने करीब 15 फीसदी रिटर्न दिया है। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने करीब 30 फीसदी रिटर्न दिए हैं। मार्केट पर दूसरी तिमाही के नतीजों का असर दिख रहा है

अपडेटेड Oct 29, 2024 पर 12:18 PM
हरि श्यामसुंदर ने कहा कि पिछले कुछ सालों में SIP से होने वाला निवेश काफी बढ़ा है। इसके बावजूद अभी आबादी का छोटा हिस्सा ही सिप के रास्ते निवेश कर रहा है।

फ्रैंकलिन टेंपलटन एसेट मैनेजमेंट (इंडिया) के वीपी हरि श्यामसुंदर को कुछ फाइनेंशियल्स, ऑटो, कंस्ट्रक्शन और कंज्यूमर सर्विसेज स्टॉक्स में निवेश के मौके दिख रहे हैं। श्यामसुंदर ने मनीकंट्रोल से बातचीत में स्टॉक मार्केट में हालिया गिरावट सहित कई मसलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इंडिया में कंज्यूमर्स की दिलचस्पी अब प्रीमियम प्रोडक्ट्स में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इंडियन मार्केट्स में शॉर्ट टर्म में कंसॉलिडेशन दिख सकता है, लेकिन लंबी अवधि में ग्रोथ की अच्छी संभावनाए हैं। श्याम सुंदर को इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट इंडस्ट्री का 15 साल का अनुभव है।

मार्केट में गिरावट का असर SIP से निवेश पर पड़ता है

क्या SIP से होने वाला निवेश स्ट्रॉन्ग बना रहेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में SIP से होने वाला निवेश काफी बढ़ा है। इसके बावजूद अभी आबादी का छोटा हिस्सा ही सिप के रास्ते निवेश कर रहा है। इसका मतलब है कि अभी सिप से निवेश बढ़ने की काफी संभावना है। हम ऐसा देख चुके हैं कि जब स्टॉक मार्केट्स से रिटर्न घटता है तो सिप से होने वाले निवेश पर भी असर पड़ता है। लेकिन, मार्केट में रिकवरी आते ही यह फिर से बढ़ जाता है। लोगों के बीच सेविंग्स और निवेश के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। इसके अलावा युवा वर्कफोर्स का हिस्सा बन रहे हैं। इससे शेयरों में निवेश बढ़ेगा। खासकर सिप के रास्ते होने वाले निवेश में इजाफा होगा।


शॉर्ट टर्म में मार्केट में कंसॉलिडेशन दिख सकता है

आगे मार्केट की चाल कैसी रहेगी? इसके जवाब में श्यामसुंदर ने कहा कि इंडियन मार्केट्स ने 2024 में अच्छा प्रदर्शन किया है। Nifty 50 ने करीब 15 फीसदी रिटर्न दिया है। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने करीब 30 फीसदी रिटर्न दिए हैं। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ ज्यादा नहीं रही। अब मार्केट पर दूसरी तिमाही के नतीजों का असर दिख रहा है। कंजम्प्शन डेटा मिलेजुले रहे हैं। अमेरिका में फेडरल रिजर्व ने सितंबर में इंटरेस्ट रेट में कमी की। इंडिया में इंटरेस्ट रेट में कमी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। उधर, जियोपॉलिटिकल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में इंडियन मार्केट में कंसॉलिडेशन दिख सकता है।

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इंडिया पर अमेरिकी चुनाव के नतीजों का नहीं पड़ेगा ज्यादा असर

क्या डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने का इंडिया पर बड़ा असर पड़ेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में इंडियन मार्केट्स के अच्छे प्रदर्शन में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ रहा है। इंडिया की ग्रोथ स्टोरी की ठोस वजहें हैं। इसलिए अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का इंडिया पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। पिछले दो दशकों से इंडिया और अमेरिका के रिश्तें मजबूत हो रहे हैं। इसमें ट्रंप का पिछला कार्यकाल भी शामिल है।

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