Daily Voice : रिफोलियो इन्वेस्टमेंट्स एंड जर्मिनेट (Refolio Investments and Germinate) के संस्थापक और मैनेजिंग पर्टनर संतोष जोसेफ का कहना है कि बाजार में वर्तमान में चल रहा कंसोलीडेशन एक हेल्दी ट्रेंड हैं। इस करेक्शन में ऐसे निवेशकों के लिए निवेश के अवसर दिख रहे हैं जो पिछले 4-5 महीनों से बाजार में चल रही तेज रैली का फायदा उठाने में चूक गए हैं। कैपिटल और इक्विटी मार्केट का 20 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले संतोष जोसेफ ने मनीकंट्रोल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि सितंबर तिमाही के नतीजों के दौरान आई मैनेजमेंट की कमेंट्री से पता चलता है कि तमाम सेक्टरों और इंडस्ट्री में तमाम नए निवेश और विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी है, ये बाजार और इकोनॉमी देनों के लिए बहुत अच्छा संकेत है।
मध्य-पूर्व और यूरोप में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव पर बनी रहे नजर
मध्य-पूर्व और यूरोप में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार पर इसके असर पर बात करते हुए संतोष जोसेफ ने कहा कि अभी हमें जो जियोपॉलिटिकल तनाव दिख रहा है, यह जल्द ही और गंभीर रुख लेता दिख सकता है। पूरी दुनिया उम्मीद कर रही है कि यह एक स्थानीय मुद्दा बन कर रह जाएगा। लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता है कि यह एक पूर्ण विकसित वैश्विक मुद्दा बन सकता है। युद्ध के पिछले 10 से 12 दिनों में अब तक इसका असर एक खास क्षेत्र और कच्चे तेल तक सीमित रहा है। अगर ये मामला सिर्फ इजराइल और हमास तक ही सीमित रहता है तो स्थितियां नियंत्रण में रहेंगी। लेकिन अगर इस संघर्ष में और दूसरे देशों की एंट्री हो जाती है तो बहुत बुरी स्थिति हो सकती है। जिससे हमारे बाजार भी अछूते नहीं रहेंगे।
100 डॉलर के ऊपर जा सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें
क्या कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकती हैं? इसके जवाब में संतोष जोसेफ ने कहा कि मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्रूड के 100 डॉलर से ऊपर जाने की संभावना को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। मध्य पूर्व अभी भी तेल उत्पादन में बहुत बड़ी हिस्सेदारी रखता। अगर मध्य-पूर्व का संघर्ष ज्यादा गंभीर हो जाता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर या उससे थोड़ा ऊपर भी जा सकती हैं। हालांकि अब तक जो संकेत यह हैं उससे लगता है कि तेल काफी हद तक नियंत्रण में है। लेकिन हम जानते हैं कि इन चीजों को भड़कने में ज्यादा समय नहीं लगता है। ऐसे में हमें बहुत सतर्क रहना होगा।
इक्विटी मार्केट पर बात करते हुए संतोष ने आगे कहा कि जियोपॉलिटिकल तनाव के अलावा उभरते बाजारों को ग्लोबल स्तर पर ब्याज दरों में हो रही बढ़त से भी खतरा है। ब्याज दरों में बढ़त से उभरते बाजारों की मुद्राएं भी कमजोर होंगी। इसके उभरते बाजारों में आने वाला विदेशी निवेश घटेगा। अगर ब्याज दरों में बढ़त पर लगाम नहीं लगती और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त जारी रहती है तो इससे इससे इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ेगा।
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