LIC IPO: लंबे इंतजार के बाद भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC ने सेबी में अपने आईपीओ की अर्जी दाखिल कर दी है। इस आईपीओ की साइज 70,000-1,00,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। Equirus की अनीथा रंगन (Anitha Rangan) का कहना है कि इस आईपीओ से सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी और लोगों में इस बात को लेकर विश्वास उत्पन्न होगा कि सरकार अपनी पूंजी खर्च योजना को तेजी से बढ़ा सकेगी और इकोनॉमी में तेज रिकवरी आती दिखेगी।
उन्होंने मनीकंट्रोल से अपने बातचीत में यह भी कहा कि एलआईसी के आईपीओ इश्यू से सरकार के अगले साल के और उसके आगे के विनिवेश प्रोग्राम की सफलता भी सुनिश्चित होगी जो इकोनॉमी के लिए पॉजिटीव फैक्टर साबित होगा।
ग्लोबल मार्केट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि रूसी फौजों के पीछे हटने के साथ ही यूक्रेन से जुड़ा तनाव कम होता नजर आ रहा है। जिसके चलते बाजार को राहत मिलती नजर आई है और इक्विटीज में तेज बढ़त भी देखने को मिली है लेकिन महंगाई और केंदीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़ी चिंता बनी हुई है जिससे बाजार से सरप्लस और इजी मनी निकलती दिख सकती है। इसी वजह से बाजार में हाल में गिरावट भी देखने को मिली है।
बढ़ती महंगाई और इक्विटी मार्केट पर इसके पड़ते प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में महंगाई को लेकर स्थितियां उतनी बुरी नहीं है। हमारा केद्रीय बैंक इसको लेकर सर्तक है लेकिन ग्लोबल महंगाई से जुड़े खतरे को नकारा नहीं जा सकता।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बाजार में आने वाली कोई गिरावट इस खास सेगमेंट अथवा स्टॉक को आर्कषक और किफायती बना देती है। ऐसे में किसी करेक्शन की स्थिति में फंडामेंटली मजबूत शेयरों में खरीदारी का अच्छा मौका होता है।
एलआईसी के आईपीओ पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि किसी आईपीओ से बाजार में करेक्शन या उतार-चढ़ाव नहीं आता। बाजार की स्थिति इकोनॉमी सेटिमेंट , ग्लोबल और घरेलू ग्रोथ से जुड़ी होती है। अगर एलआईसी जैसा कोई बड़ा आईपीओ सफल होता है तो इससे इन्वेस्टरों के कॉन्फिडेंस में और मजबूती आएगी और भारतीय बाजार पर ग्लोबल और घरेलू दोनों निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।