Daily Voice : फर्स्ट वाटर कैपिटल के को-फाउंडर अरुण चुलानी ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे नहीं लगता कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का संकेत देगा। भारतीय केंद्रीय बैंक सख्त नीति अपना रहा है।" उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था अभी भी 7-8 फीसदी की दर से बढ़ रही है, इसलिए आरबीआई की तरफ से मांग बढ़ाने की कोशिश की तत्काल कोई जरूर नहीं दिखती।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और इक्विटी मार्केट का 20 साल से ज़्यादा का अनुभव रखने वाले अनुभवी निवेश पेशेवर अरुण चुलानी ने कहा कि फ़र्स्ट वॉटर कैपिटल केमिकल सेक्टर पर बुलिश नजरिया रखता है। हम कीमतों, मार्जिन और मांग पर बारीकी से नज़र रख हुए हैं ताकि अंदाजा लगा सकें कि रिकवरी के संकेत कब दिखेंगे। उम्मीद है कि हम केमिकल सेक्टर के लिए बेहतर समय की शुरुआत के करीब हैं।
इस बातचीत में अरुण चुलानी ने आगे कहा कि ऑटो सेक्टर निश्चित रूप से एक ऐसा सेक्टर है जिस पर विश्वास कायम है। लेकिन शेयर बाजार अक्सर दो पक्षों की कहानी होती है। ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में 100 से ज्यादा लिस्टेड कंपनियां वैल्यू चेन में हैं। कुछ शेयरों में तेजी के बावजूद कई शेयरों में अभी भी वैल्यू दिख रही है। यह वह स्पेस है जिस पर फ़र्स्ट वॉटर कैपिटल का फोकस है। ऑटो सेक्टर के ओवर-वैल्यूएशन के कॉल से परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि अल्फा रिटर्न हासिल करने के लिए केवल कुछ स्टॉक्स की जरूरत है।
केमिकल सेक्टर पर बात करते हुए अरुण चुलानी ने कहा कि वे केमिकल शेयरों के प्रबल समर्थक हैं और यह सबसे बड़े सेक्टरों में से एक है। चीन से सुस्त मांग, हाई इन्वेंट्री और कुछ मामलों में बढ़ी हुई क्षमता कुछ केमिकल कंपनियों के लिए डाउनसाइकिल का कारण बनी। उन्होंने आगे कहा कि कीमतों, मार्जिन और मांग पर बारीकी से नजर है ताकि यह देखा जा सके कि रिकवरी की किरणें कब दिखाई देंगी। उम्मीद है कि यह सेक्टर बेहतर समय की शुरुआत के करीब हैं। चीन पर हमेशा नज़र रखना जरूरी है क्योंकि आम तौर पर यह अधिकांश बुनियादी वस्तुओं का 40-50 फीसदी उत्पादन करता है। चीन में हाल ही में आया प्रोत्साहन पैकेज मांग को बढ़ाने के लिए एक ट्रिगर के रूप में काम कर सकता है। लंबी अवधि के नजरिए से ये सेक्टर अच्छा लग रहा है।
इस बातचीत में अरुण चुलानी ने बताया कि हाल ही में उन्होंवे फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में अपनी पोजीशन फिर से बनाई है। इसने अब तक उनके लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। यह उनको लिए अल्फा रिटर्न के लिए एक ही पूल में दो बार डुबकी लागने का मामला है। अरुण ने बताया कि 2022 के दौरान उन्होंने इस सेक्टर को हैवीवेट से लाइटवेट में बदल दिया था। उस समय, तेल की उच्च कीमतों के कारण मार्जिन बढ़ने से सेक्टर को लाभ हुआ, महामारी के कारण पैकेज्ड सामानों की मांग में उछाल आया, पीपीई की मांग बढ़ी और कुछ कंपनियों के अधिग्रहण की खबरें आईं। अच्छे समय ने नई क्षमता के लिए प्रेरित किया। फिर अधिक क्षमता के कारण मार्जिन में गिरावट आई। इसका असर स्टॉक की कीमतों पर पड़ा। जिससे हर कोई इस सेक्टर से भागने लगा। हालांकि, फर्स्ट वाटर ने सेक्टर की ट्रैकिंग जारी रखी। इस साल की शुरुआत से स्थितियां फिर से सुधरीं। उसके बाद इस सेक्टर में फिर पोजीशन बढ़ाई गई।
अरुण ने कहा कि निजी बैंकों पर भी उनकी नज़र हो जो इस रैली में पीछे छूट गए हैं। निजी बैंक अब तेजी के संकेत दे रहे उनका वैल्यूएशन अच्छा है। इसके साथ ही केमिकल सेक्टर भी अरुण को पसंद है।
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