Daily Voice: अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर में संकट का दूसरा दौर अमेरिका और यूरोप में हाउसिंग मार्केट में मंदी के चलते आएगा। ये बातें आशिका ग्लोबल फैमिली ऑफिस सर्विसेज के को-फाउंडर अमित जैन ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि कैलेंडर ईयर 2023 में अब तक यूएस फेड ने अपनी दरों को एक साल में 0.25 फीसदी से बढ़ाकर 4.75 फीसदी कर दिया है। ये 2004 के बाद अब तक ब्याज दरों में की गई सबसे तेज बढ़ोतरी है। भारतीय बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज का 18 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अमित जैन शॉर्ट और मीडियम टर्म के नजरिए से इक्विटी बाजार को लेकर सतर्क रहने के पक्षधर हैं। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि जब तक हमें यूएस बॉन्ड में लगातार गिरावट देखने को नहीं मिलती तब तक ग्लोबल मार्केट के आउट परफॉर्म करने की संभावना बहुत कम नजर आ रही है।
ग्लोबल फाइनेंशियल संकट 2.0 की शुरुआत
ग्लोबल बैंकिंग संकट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह ग्लोबल फाइनेंशियल संकट 2.0 की शुरुआत है। पूरी दुनिया में 15 बैंकों की तरफ से डिफाल्ट करने की संभावना है। जिनमें कुछ बड़े ग्लोबल बैंकों के नाम शामिल हैं। SVB बैंक इस श्रृंखला का पहला बैंक है। अभी हमें इस तरह की और खबरें सुनने को मिल सकती हैं। अब आगे यूएस और यूरोपियन बाजार में हाउसिंग मार्केट में मंदी के साथ ही इस संकट का दूसरा चरण शुरू हो सकता है।
क्या मई 2023 में यूएस फेड ब्याज दरों में बढ़त पर रोक लगा सकता है?
इस सवाल के जवाब में अमित ने कहा कि इस बात की 80 फीसदी संभावना है कि जुलाई 2023 में यूएस फेड की दरें अपने पीक पर होंगी। हालांकि महंगाई के आंकड़ों में बदलाव के साथ हमारे पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। अभी तक अमेरिका और यूरोप में महंगाई की स्थिति खराब नजर आ रही है। यह मीडियम से शॉर्ट टर्म नजरिए से ग्लोबल ग्रोथ के लिए एक बड़ा जोखिम है।
इस समय कैपिटल गुड्स को छोड़कर अधिकांश सेक्टरों का वैल्यूएशन अच्छा
भारतीय बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय कैपिटल गुड्स को छोड़कर अधिकांश सेक्टरों का वैल्यूएशन अच्छा लग रहा है। कैपिटल गुड्स में पिछले एक साल में काफी तेजी आई है। जिससे यह सेक्टर अब महंगा हो गया है। ब्याज दरों में बढ़त के माहौल में ग्लोबल स्तर पर निवेशकों का रुझान इक्विटी मार्केट से हटकर बॉन्ड मार्केट की तरफ बढ़ा है। ऐसे में हमें लगता है कि ग्लोबल इक्विटी मार्केट में दबाव देखने को मिलेगा। लेकिन उनका यह भी मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को इस समय बैंकिंग, आईटी और फर्मा सेक्टर के क्वालिटी शेयरों में सिस्टमेटिक तरीके से निवेश की शुरुआत करनी चाहिए।
भारतीय आईटी कंपनियां अपने बुरे दौर से अंतिम चरण में
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां अपने बुरे दौर से अंतिम चरण में चल रही हैं। इंफोसिस और टीसीएस के चौथी तिमाहियों के नतीजों से लगता है कि अब लार्ज कैप आईटी कंपनियों के लिए बॉटम बन चुका है। यहां से इनमें सुधार आता दिखेगा। आईटी स्टॉक में कुछ ठहराव और टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है। लेकिन कीमतों के नजरिए से देखें तो आईटी कंपनियां 30 जुलाई 2023 के पहले कभी भी बॉटम आउट होती नजर आ सकती हैं।
क्या यह ग्रीन मेटल में निवेश का समय है?
इस सवाल का जवाब देते हुए अमित ने आगे कहा कि पर्यावरण में ग्लोबल स्तर पर होने वाले बदलाव को देखते हुए आगे दुनिया का फोकस इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर होगा। ऐसे में निवेशकों को हमारी सलाह होगी कि वो अपने पोर्टफोलियो में 10 फीसदी हिस्सेदारी ग्रीन मेटल्स और उससे जुड़े सेक्टरों को दें। उम्मीद है कि साल 2030 तक ग्लोबल ऑटोमोटिव मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की भागीदारी 30 फीसदी के आसपास होगी।
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