अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें तय करने वाली बॉडी, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की नवीनतम बैठक के मिनट को पढ़ने के बाद भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस (Bharti AXA Life Insurance) के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफीसर राहुल भुस्कुटे (Rahul Bhuskute) का मानना है कि उच्च ब्याज दरों का दौर अभी आगे भी कायम रहेगा। मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम में तस्वीर धुंधली बनी हुई है। इससे भारत भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। अमेरिका के विपरीत हम भारत में पहले भी 6 फीसदी महंगाई दर के साथ रह चुके हैं। जबकि अमेरिका के लिए 5 फीसदी का महंगाई आंकड़ा एक डरावना सपना है।
उन्होंने आगे कहा “इसके अलावा, भारत में भी, कोर इन्फ्लेशन स्थिर बनी हुई है। इसलिए मुझे लगता है कि ब्याज दरें बाजार की उम्मीद से ज्यादा लंबे समय तक ऊपरी स्तरों पर बनी रहने वाली हैं।" बताते चलें कि राहुल भुस्कुटे को इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 25 सालों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने एक निवेश बैंकर के रूप में शुरुआत की और फिर असेट मैनेजमेंट के प्रोफेशन में आ गए।
एफआईआई बाजार की दिशा तय करने में निभाएंगे अहम भूमिका
इक्विटी मार्केट पर आपकी क्या राय है? इसके जबाव में राहुल भुस्कुटे ने कहा कि उनका मानना है कि अंतत: एक समय ऐसा आएगा जब दरों में कटौती होगी, लेकिन यह कटौती बाजार की उम्मीद की तुलना में देर से होगी। तब तक बाजार अनिश्चितता बनी रहेगी। मई में भारतीय बाजारों में थोड़ी तेजी आई। भारतीय बाजारों ने इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में उभरते बाजारों की तुलना में कुछ कमजोर प्रदर्शन किया था। लेकिन अब इसमें कुछ सुधार देखने को मिल रहा। राहुल को लगता है कि आगे चलकर एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) निवेश बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
एफआईआई की तरफ से हो रही खरीदारी बाजार के लिए अच्छी बात
एफआईआई ने मई में भारतीय बाजार में 24000 करोड़ रुपये से ज्यादा की इक्विटी खरीदी है। क्या आपको लगता है कि एफआईआई ने वापसी की है? इस पर राहुल ने कहा कि उन्हें लगता है कि एफआईआई की तरफ से तीन-चार महीनों तक लगातार खरीदारी बने रहने के बाद ही हम कह सकते हैं कि एफआईआई एक बार फिर से भारत को लेकर बुलिश हो गए हैं। इस समय हम सिर्फ यही कह सकते हैं की एफआईआई की तरफ से हो रही खरीदारी बाजार के लिए अच्छी बात है।
बैंक शेयर लग रहे काफी अच्छे
राहुल ने इस बातचीत में आगे कहा कि निवेश के नजरिए से उनको बैंक शेयर काफी अच्छे दिख रहे हैं। ये काफी हद तक एक घरेलू सेक्टर है। अगले कुछ वर्षों में बैंकिंग सेक्टर 11-12 फीसदी की लोन ग्रोथ आराम से देखने को मिल सकती है। आईसीआईसीआई बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) 4.9 फीसदी और कोटक महिंद्रा बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 5.8-5.9 फीसदी है। ये काफी अच्छे आंकड़े हैं। इसके साथ ही कम ऋण लागत (लो इंटरेस्ट कॉस्ट) इस सेक्टर को बहुत आकर्षक बना रहा है।
निजी बैंक सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर
निजी क्षेत्र के बैंकों के पास इस लोन और डिपॉजिट दोनों में बड़ी बाजार हिस्सेदारी हथियाने की क्षमता है। पीएसयू बैंक पिछले कुछ सालों खराब लोन बुक और बैलेंस शीट पर दबाव के कारण जोखिम से बचते दिख रहे हैं। ऐसे में निजी बैंक बाजार में बने इस गैप की भरपाई कर सकते हैं। अगले कुछ सालों में लगातार ग्रोथ के नजरिए से निजी बैंक सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर दिख रहे हैं। ऐसे में राहुल भुस्कुटे को सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंक ज्यादा पसंद हैं।
राहुल भुस्कुटे को रियल एस्टेट शेयर भी हैं पसंद
राहुल भुस्कुटे को रियल एस्टेट शेयर भी पसंद हैं। उनका मानना है कि इस सेक्टर में अगले 3-4 साल तक तेजी कायम रहेगी। यह एक रेट सेंसेटिव सेक्टर है लेकिन यह नॉमिनल रेट के बजाय वास्तविक दरों पर ज्यादा निर्भर होता है। वास्तविक दरें अभी भी 0-0.5 फीसदी हैं। मुंबई, पुणे, हैदराबाद, एनसीआर के कुछ हिस्सों और अहमदाबाद जैसे शहरों से एंड यूजर्स की मांग में मजबूती है। इसका फायदा रियल एस्टेट कंपनियों को मिलेगा।
आईटी और मेटल सेक्टर पर अंडर वेट
दूसरी तरफ राहुल आईटी और मेटल सेक्टर पर अंडर वेट हैं। सप्लाई चेन में आई दिक्कतों, यूक्रेन-रूस युद्ध और चीन की इकोनॉमी के फिर से खुलने से मेटल की कीमतों में बढ़त हुई थी। लेकिन अब मेटल की कीमतों के इन स्तरों पर टिके रहने की उम्मीद नहीं है। चीन की इकोनॉमी की मंदी मेटल के लिए बहुत बड़ा निगेटिव फैक्टर है। भारतीय आईटी कंपनियों के सबसे अहम बाजार अमेरिका और यूरोप में दिक्कतों को देखते हुए राहुल आईटी सेक्टर पर भी अंडरवेट हैं।
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