लंबे समय तक ब्याज दर ऊंचे स्तरों पर बने रहने की संभावना को देखते हुए इक्विटी बाजार में वैल्यूएशन का एडजस्टमेंट अभी भी जारी है जिसके चलते अगले 3-6 महीने में इक्विटी मार्केट के वोलैटाइल बने रहने की संभावना है। ये बातें टाटा म्यूचुअल फंड के राहुल सिंह ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं।
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि कंपनियों के नतीजे अब तक न्यूट्रल या थोड़े पॉजिटिव रहे हैं। बैंकों ने पॉजिटीव सरप्राइस दिया है। बैंकिंग सेक्टर को क्रेडिट ग्रोथ, मार्जिन में विस्तार और निम्न कर्ज लागत का फायदा मिला है। वहीं आईटी सेक्टर से जितने खराब प्रदर्शन की उम्मीद थी उनका प्रदर्शन उतना खराब नहीं रहा है। आईटी कंपनियों की डील पाइपलाइन और मार्जिन का लेवल बेहतर रहा है। जिससे इस सेक्टर को सपोर्ट मिला है।
गौरतलब है कि राहुल सिंह टाटा म्यूचुअल फंड में चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर इक्विटीज हैं । इनको फाइनेंशियल मार्केट का 26 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि अमेरिका में मंदी का कोई ना कोई रूप जरुर देखने को मिलेगा और शेष बचे 2023 में ब्याज दरें ऊंचे स्तरों पर बनी रहेंगी। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि आगे हमें जियोपॉलिटिकल तनाव में बढ़त की संभावना नजर आ रही है। जिसका असर कच्चे तेल, दूसरी कमोडिटीज की कीमतों, करेंसी के साथ ही इक्विटी रिस्क प्रीमियम पर देखने को मिल सकता है।
जहां तक भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर की बात है कि तो यह अब तक तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। अगर दुनिया में कोई मंदी आती है तो इससे भारतीय इकोनॉमी को फायदा मिल सकता है। डोमेस्टिक साइकिल में रिकवरी के चलते आगे भारतीय कंपनियों के आय और मार्जिन में सुधार संभव है। हालांकि अगर विदेशी बाजारों में एक बड़ी मंदी आती है तो आईटी और दूसरे एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टरों पर दबाव दिख सकता है। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि हमें बैकिंग, कैपेक्स साइकिल और शहरी खपत से जुड़े शेयरों में तेजी आती नजर आ सकती है।
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