कमजोर ग्लोबल संकेत घरेलू बाजार पर भारी पड़ रहे हैं जिसके चलते बाजार में आज लगातार चौथे दिन गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स ने आज 1200 अंकों का गोता लगाया है। वहीं निफ्टी 17200 के नीचे फिसल गया है। बाजार का वोलैटिलिटी इंडेक्स, इंडिया विक्स भी 12 फीसदी ऊपर चढ़ गया है। आज के कारोबार में मेटल को छोड़कर ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिल रही है।
इंफोसिस में 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। इंफोसिस के नतीजों ने पूरे आईटी सेक्टर का मूड़ बिगाड के रख दिया है। जिसके चलते टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक जैसे आईटी दिग्गजों में भारी गिरावट आई है।
नतीजों के बाद एचडीएफसी बैंक की भारी पिटाई होती दिख रही है। एचडीएफसी बैंक के उम्मीद से कमजोर नतीजों ने बैंक शेयरों पर दबाव बनाया है। एचडीएफसी पर दिग्गज ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि आगे बैंक के मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। आज यह शेयर करीब 4 फीसदी लुढ़का है। इस बीच मारुति और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने का एलान किया है। मारूति की कीमत में बढ़ोतरी आज से लागू है। एमएंडएम की गाड़ियां भी 60,000 रुपये तक महंगी हुई हैं।
इस बीच सरकार को खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई के मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है। मार्च में थोक महंगाई दर फरवरी के 13.11 फीसदी से बढ़कर 14.55 फीसदी पर आ पहुंच गई।
आइए डालते हैं बाजार में आई इस गिरावट की वजहों पर एक नजर
2022 की पहली तिमाही में चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट 4.8 फीसदी पर रही जो कि पिछली यानी चौथी तिमाही में 4 फीसदी पर रही थी। यह आकंड़े मार्च महीने में कोविड के कारण चीन में पैदा हुई दिक्कतों के बावजूद अनुमान से बेहतर रहे हैं। लेकिन जानकारों का अनुमान है कि ग्रोथ के इस आंकड़े में कोविड के कारण लगे पूरे झटके का प्रभाव शामिल नहीं है क्योंकि शंघाई के अलावा भी चीन के कई ऐसे शहरों में लॉकडाउन लागू हुआ था जो देश की आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं। इसके अलावा चीन के केंद्रीय बैंक ने वीकेंड के दौरान अधिकांश बैंकों के लिए RRR (reserve requirement ratio) ने 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की शुरुआत कर दी है। हालांकि चीन के सेंट्रल बैंक ने अपनी ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि चीन द्वारा अपनी इकोनॉमी को राहत देने के लिए उठाए गए ये कदम उम्मीद से कम हैं। जिसका निगेटिव असर बाजार में देखने को मिला है।
मार्च में खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी पर रही है जबकि CNBC-TV18 के पोल में इसके 6.28 फीसदी पर रहने का अनुमान किया गया था। Citi, HSBC and Kotak जैसे ब्रोकरेज हाउसों ने इस साल के लिए अपने महंगाई दर के अनुमान को बढ़ा दिया है। जिसके साथ ही यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरबीआई आगे अपनी रेपो रेट में 6 बार बढ़ोतरी करता नजर आ सकता है। Citi, HSBC का अनुमान है कि अप्रैल 2023 तक रेपो रेट 5.5 फीसदी तक पहुंच सकती है जो कि वर्तमान में 4 फीसदी पर है।
आईटी इंडेक्स में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
इंफोसिस में 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। इंफोसिस के नतीजों ने पूरे आईटी सेक्टर का मूड बिगाड के रख दिया है। जिसके चलते टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक जैसे आईटी दिग्गजों में भारी गिरावट आई है। नतीजों के बाद एनालिस्ट ने इंफोसिस के मार्जिन अनुमान में कटौती कर दी है। Jefferies India ने इंफोसिस के मार्जिन अनुमान में 1 से 1.7 फीसदी की कटौती की है। इसी तरह ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि वित्त वर्ष 2023 में इंफोसिस के एबिट मार्जिन में सालाना आधार पर 1 फीसदी की गिरावट आ सकती है और यह 22 फीसदी पर रह सकती है जबकि 2022-24 के दौरान इसके ईपीएस में 5-7 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है।
सप्लाई घटने की आशंका और EU के रूस पर प्रतिबंध लगाने के संभावनों से क्रूड की कीमतें 113 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड एक हफ्ते में 9.50% से ज्यादा चढ़ा है। इधर ओपेक लक्ष्य से कम उत्पादन कर रहा है जिसके चलते लगातार दूसरे हफ्ते ब्रेंट की कीमतों में तेजी आई है और यह अप्रैल के उच्चतम स्तरों के ऊपर पहुंच गया है। उधर WTI का भाव भी 107 डॉलर के ऊपर निकल गया है और इसने आज 108 डॉलर का स्तर छू लिया है। कच्चे तेल में आए इस उबाल का असर स्टॉक मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है।
ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत
ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत मिल रहे हैं जिसका असर आज भारतीय बाजारों पर देखने को मिला है। पिछले कारोबारी दिन अमेरिका बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे। वहीं गुरुवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में बढ़त देखने को मिली थी। बाजार में अमेरिका के साथ ही दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीतियों में कड़ाई करने का अनुमान लगाया जा रहा है। बाजार का मानना है कि बढ़ती महंगाई के कारण दुनिया भर की तमाम बड़ी इकोनॉमी पर अब कोविड महामारी के दौरान शुरु किए गए राहत उपायों की वापसी जल्द ही शुरु होने वाली है। इसके चलते ग्लोबल संकेत कमजोर नजर आ रहा है। जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला है।
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