Dalal Street Week Ahead: तेजी या गिरावट? किस ओर बढ़ेगा बाजार; RBI MPC मिनट्स, तेल कीमत, FII Flow समेत 10 अहम फैक्टर्स से होगा तय
बीते सप्ताह में BSE Sensex 2.37 प्रतिशत बढ़ा और 71,605 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद 71,483 पर बंद हुआ। दलाल स्ट्रीट में आम सहमति यह है कि विदेशी निवेशक जोरदार वापसी कर रहे हैं। आगे चलकर उनकी ओर से भारतीय शेयरों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। सकारात्मक वैश्विक और घरेलू संकेत, इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि शेयर बाजार की रैली जारी रह सकती है
बीता सप्ताह मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रेट्स पर रुख से प्रभावित था।
Dalal Street Week Ahead: भारतीय बाजारों में लगातार सात सप्ताह तक तेजी देखी गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यह तेजी आने वाले सप्ताह में भी बरकरार रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार सकारात्मक वैश्विक और घरेलू संकेत, इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि रैली जारी रह सकती है। इन संकेतों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का नरम रुख, FII की ओर से शेयर खरीदारी, बेहतर मैक्रो डेटा शामिल हैं। हालांकि कुछ कंसोलिडेशन से इनकार नहीं किया जा सकता है। बीते सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स 2.37 प्रतिशत बढ़ा और 71,605 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद 71,483 पर बंद हुआ।
निफ्टी 50 2.32 प्रतिशत बढ़ा और 21,492.30 के नए रिकॉर्ड हाई को छूने के बाद 21,456 पर बंद हुआ। अब 18 दिसंबर से शुरू हो रहे नए सप्ताह में कौन से फैक्टर्स शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे, आइए जानते हैं...
बैंक ऑफ जापान मॉनेटरी पॉलिसी
बीता सप्ताह मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रेट्स पर रुख से प्रभावित था। कहा जा रहा कि अब ध्यान 19 दिसंबर को बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर रहेगा। स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा का कहना है कि यह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जापानी येन मजबूत हो रहा है। बैंक ऑफ जापान की ओर से किसी भी तरह की सख्ती से येन कैरी ट्रेड खत्म होने का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जापान का केंद्रीय बैंक इस साल का अंत दुनिया के सबसे नरम बैंकों में से एक के रूप में कर सकता है। कमजोर खपत जैसे फैक्टर्स के चलते, बैंक ऑफ जापान से व्यापक रूप से अपनी बेहद ढीली मौद्रिक नीति बरकरार रखने की उम्मीद है।
RBI MPC मिनट्स
22 दिसंबर को भारतीय रिजर्व बैंक, दिसंबर की पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स जारी करेगा। 8 दिसंबर को मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। मीटिंग के मिनट्स आरबीआई के रुख को और स्पष्ट करेंगे।
प्राइमरी मार्केट की गतिविधि
पिछले सप्ताह प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल रही क्योंकि कई कंपनियों के आईपीओ आए। साथ ही कइयों ने शेयर बाजारों में शुरुआत की। 18 दिसंबर से शुरू हो रहे नए सप्ताह में मेनबोर्ड सेगमेंट की DOMS इंडस्ट्रीज, इंडिया शेल्टर फाइनेंस और आईनॉक्स इंडिया शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती हैं। डोम्स और इंडिया शेल्टर फाइनेंस के आईपीओ क्लोज हो चुके हैं, जबकि आईनॉक्स इंडिया का इश्यू 18 दिसंबर को बंद होने वाला है। ये सभी कंपनियां टी+3 लिस्टिंग मानदंडों के अनुसार शेयर बाजार में सूचीबद्ध होंगी, यानि कि आईपीओ क्लोज होने के 3 दिन बाद। पिछले सप्ताह क्लोज हुए एसएमई आईपीओ भी नए सप्ताह में शेयर बाजारों में अपनी शुरुआत करेंगे जैसे कि प्रेस्टोनिक इंजीनियरिंग, एसजे लॉजिस्टिक्स, बेंचमार्क कंप्यूटर सॉल्यूशंस, सियाराम रिसाइक्लिंग, श्री ओएसएफएम ई-मोबिलिटी।
नए खुलने वाले आईपीओ की बात करें तो 18 दिसंबर को सूरज एस्टेट डेवलपर्स, मोतीसंस ज्वैलर्स, मुथूट माइक्रोफिन के आईपीओ ओपन होंगे। इसके बाद 19 दिसंबर को हैप्पी फोर्जिंग्स, आरबीजेड ज्वैलर्स, मुफ्ती मेन्सवियर के आईपीओ खुलेंगे। आजाद इंजीनियरिंग का आईपीओ 20 दिसंबर को खुलेगा, जबकि इनोवा कैपटैब 21 दिसंबर को खुलेगा। ये सभी मेनबोर्ड सेगमेंट के इश्यू हैं। एसएमई सेगमेंट में निवेशक सहारा मैरीटाइम, शांति स्पिनटेक्स, इलेक्ट्रो फोर्स और ट्राइडेंट टेकलैब्स पर नजर रख सकते हैं।
दलाल स्ट्रीट में आम सहमति यह है कि विदेशी निवेशक जोरदार वापसी कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों में लगभग 75,000 करोड़ रुपये की इक्विटी बेचने के बाद, एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने दिसंबर में अब तक 29,700 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी है। अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आने, 3 राज्यों के चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद राजनीतिक निरंतरता की आस और भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाने वाले आंकड़ों के चलते एफआईआई फिर से निवेशक बन गए हैं। आगे चलकर उनकी ओर से भारतीय शेयरों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
कच्चे तेल की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा है कि 2024 में वैश्विक तेल मांग 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी। यह इसके पिछले पूर्वानुमान 930,000 बैरल प्रति दिन से थोड़ा अधिक है। शेयरखान के मुताबिक अल्पावधि में कच्चा तेल बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। सपोर्ट $70/$67 पर है। तेल की कीमतों पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की लगातार नजर रहने वाली है।
US Q3 GDP वृद्धि
वैश्विक निवेशक चालू कैलेंडर वर्ष की सितंबर तिमाही के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के अंतिम जीडीपी आंकड़ों पर नजर रखेंगे। नवंबर में पब्लिश दूसरे अनुमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी। अक्टूबर महीने में पब्लिश शुरुआती अनुमान 4.9 प्रतिशत का था।
वैश्विक आर्थिक डेटा
अमेरिका में नवंबर माह में नए घरों की बिक्री, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर, व्यक्तिगत आय व खर्च आदि आंकड़ों पर भी नजर रहने वाली है। नए सप्ताह के प्रमुख वैश्विक आर्थिक डेटा पॉइंट्स इस तरह हैं...
टेक्निकल व्यू
निफ्टी अपनी तेजी को बरकरार रख रहा है। इनवेस्टमार्ट के मीणा का मानना है कि इमीडिएट टार्गेट 21,700 पर है, जिसके आगे बढ़कर 22,000 तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि इसके बाद कुछ कंसोलिडेशन हो सकता है। डाउनसाइड पर 21,200 इमीडिएट सपोर्ट के तौर पर है, जबकि 21,000 किसी भी गिरावट की स्थिति में एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है।
F&O संकेत
ऑप्शंस डेटा से पता चलता है कि आने वाले हफ्तों में निफ्टी50 के 21,300-21,000 जोन पर सपोर्ट के साथ 22,000-22,200 जोन की ओर बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन पुट-कॉल रेशियो 1.47 के स्तर (पिछले लगातार 12 सत्रों में उच्चतम) पर है। इसे देखते हुए कुछ कंसोलिडेशन और रिट्रेसमेंट से इंकार नहीं किया जा सकता है। चालू माह में सूचकांक 6 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है।
अगले सप्ताह के प्रमुख कॉरपोरेट एक्शंस इस तरह हैं...
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।