अगले दो साल में कोल इंपोर्ट की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी। स्टील और पावर प्लांट को कोयला सस्ते में मिलेगा। सीएनबीसी आवाज को मिली एक्सक्लूसिव सूत्रो के जरिये जानकारी मिली है कि इसके लिए कोयला मंत्रालय ने ठोस रोडमैप भी तैयार कर लिया है। सरकार का कोयला आयात करने की निर्भरता खत्म करने के लक्ष्य के तहत ये रोडमैप बनाया जा रहा है। बाहर से कोयला आयात नहीं होने पर स्टील और पावर प्लाट्स को फायदा होगा क्योंकि इनको सस्ती कीमतों पर कोयला मिल सकेगा। इस खबर को खास सूत्रों के जरिये सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने ब्रेक किया।
लक्ष्मण रॉय ने इस पर विस्तार से बताते हुए कहा कि अगले दो साल में कोयला इंपोर्ट की निर्भरता खत्म होने से सरकार को करीब 1 से 2 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। अभी हम करीब 21.8 करोड़ टन कोयले का आयात करते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कोकिंग कोल है जो सबसे महंगा होता है। हम लगभग 5.2 करोड़ टन कोकिंग कोल का आयात करते हैं।
कोयला इंपोर्ट को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा रणनीति बनाई जा रही है। पहली ये कि कोकिंग कोल के उत्पादन को बढ़ाया जायेगा। इसके लिए 12 माइन्स को नीलमी के लिए रखा गया है। इससे करीब 2.6 करोड़ टन कोकिंग कोल का उत्पादन किया जा सकेगा। प्राइवेट कंपनियों के साथ ही कोल इंडिया (Coal India) की सहायक कंपनियों से कोकिंग कोल का उत्पादन करवाकर करीब दो तिहाई कोकिंग कोल देश में भी उत्पादित किया जायेगा।
नॉन कोकिंग कोल के बारे में लक्ष्मण ने कहा कि इसमें सालाना 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा जायेगा। अभी 16 करोड़ टन नॉन कोकिंग कोल का आयात किया जाता है।
लक्ष्मण ने आगे कहा कि इस समय कोयला इंपोर्ट बिल करीब 3 लाख करोड़ रुपये है। सरकार का रोडमैप तैयार होने के बाद स्टील प्लांट को सीधे कोकिंग कोल की आपूर्ति की जायेगी। इस योजना से आगे चलकर NTPC, TATA POWER, TORRENT POWER और ADANI POWER जैसी कंपनियों को सस्ते में कोयला मिल सकेगा।
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