व्हाट्सऐप और टेलीग्राम को रेग्यूलेट करने पर टेलीकॉम कंपनियों और टेक कंपनियों के बीच विवाद , ट्राई ने जारी किया कंसल्टेशन पेपर

ट्राई ने लाइसेंस ऑथराइजेशन के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस पर ट्राई आज सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक कर रहा है। COAI की राय है कि नए टेलीकॉम बिल में सरकार के पास रेगुलेशन का अधिकार है। उसका कहना है कि कंपनियां नेटवर्क में निवेश कर रही हैं, जबकि ऐप मुफ्त में चल रहे हैं

अपडेटेड Aug 21, 2024 पर 2:36 PM
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टेलीकॉम और टेक कंपनियों के बीच विवाद की वजह व्हाट्सऐप और टेलीग्राम को लाइसेंस के दायरे में लाने की मांग है

व्हाट्सऐप, टेलीग्राम जैसे ऐप को रेग्यूलेशन के दायरे में लाने पर टेलीकॉम कंपनियों और टेक कंपनियों के बीच फिर विवाद पैदा हो गया है। इसी मसले पर ट्राई आज स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर रहा है। पूरी खबर बताते हुए सीएनबीस-आवाज़ के असीम मनचंदा ने कहा किटेलीकॉम और टेक कंपनियों के बीच विवाद की वजह व्हाट्सऐप और टेलीग्राम को लाइसेंस के दायरे में लाने की मांग है। टेलीकॉम कंपनियों ने सेम सर्विस सेम रूल की मांग की है।

ट्राई ने लाइसेंस ऑथराइजेशन के लिए जारी किया कंसल्टेशन पेपर

असीम ने आगे बताया कि ट्राई ने लाइसेंस ऑथराइजेशन के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस पर ट्राई आज सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक कर रहा है। बता दें NASSCOM, IAMAI (Internet & Mobile Asso. of India) ने लाइसेंस का विरोध किया है। उनका कहना है कि टेलीकॉम एक्ट में ऐप के लिए कोई अधिकार नहीं है। इस पर ट्राई इसी महीने के अंत में अपनी सिफारिशें भेजेगा।


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टेलीकॉम कंपनियों की सबके लिए सेम सर्विस सेम रूल की मांग

वहीं, COAI की राय है कि नए टेलीकॉम बिल में सरकार के पास रेगुलेशन का अधिकार है। उसका कहना है कि कंपनियां नेटवर्क में निवेश कर रही हैं, जबकि ऐप मुफ्त में चल रहे हैं। टेलीकॉम कंपनियों ने सबके लिए सेम सर्विस सेम रूल की मांग की है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों ने ट्राई से इन ओटीटी (ओवर-द-टॉप) कम्यूनिकेशन ऐप्स के लिए लाइसेंस या परमिशन बनाने के लिए कहा है, जिसमें कहा गया है कि वे मोबाइल फोन ऑपरेटरों के जैसी ही सर्विस ही प्रोवाइड कर रहे हैं। टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि इन ऐप्स ने लोगों को टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं से दूर कर दिया है। वे चाहते हैं कि सरकार इन ऐप्स को लाइसेंस दे या फिर इन पर कुछ नियम बनाए।

मैसेजिंग ऐप्स का क्या है कहना?

हालांकि, इन मैसेजिंग ऐप्स का कहना है कि उन पर पहले से ही IT कानून लागू होते हैं और उन्हें अलग से लाइसेंस की जरूरत नहीं है। दूसरी तरफ, टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार के उस प्रस्ताव का भी समर्थन किया है जिसमें पूरे देश के लिए एक ही तरह का टेलीकॉम लाइसेंस बनाने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इससे काम करने में आसानी होगी और लागत भी कम आएगी।

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